कंट्रोवर्शियल

अखाड़ों के शुद्धिकरण की मांग: कालनेमी साधुओं और गृहस्थ महामंडलेश्वरों पर कार्रवाई के फैसले का पुजारी महासंघ ने किया स्वागत

अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रवींद्र पुरी को लिखा पत्र; उज्जैन में गृहस्थ संतों की सर्वाधिक संख्या का दावा, 'चादर ओढ़ाने' की प्रथा पर भी उठाए सवाल

उज्जैन। देश में साधु-संतों, बड़े विद्वानों और कथावाचकों की विशाल संख्या होने के बावजूद सनातन धर्म पर हो रहे कुठाराघात को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ा रुख अपनाया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी और राष्ट्रीय सचिव रूपेश मेहता ने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी द्वारा ‘कालनेमी’ (वेशधारी) साधुओं और ‘गृहस्थ’ महामंडलेश्वरों पर सख्त कार्रवाई करने के संकल्प का पुरजोर स्वागत किया है। इस संबंध में महासंघ ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र भेजकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए उनके इस वक्तव्य को दृढ़तापूर्वक लागू करने का आग्रह किया है।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अखाड़ा परिषद के इस कड़े कदम से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों में एक नई आशा बंधी है कि साधु समाज में आई विकृतियों पर अब प्रभावी रूप से अंकुश लगेगा। भेजे गए पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि देश में सबसे ज्यादा गृहस्थ महामंडलेश्वर उज्जैन में ही हैं। पत्र में शहर के कई ऐसे गृहस्थ महामंडलेश्वरों और कालनेमी साधुओं के नामों का भी जिक्र किया गया है, जो अपने अखाड़ों व आश्रमों में बाकायदा अपने परिवार के साथ निवास करते हैं और अपने नाती-पोतों के साथ खेलते देखे जा सकते हैं। महासंघ ने स्पष्ट मांग की है कि जो भी साधु-संत, महामंडलेश्वर और साध्वियां मंदिरों व अखाड़ों की मर्यादा, परंपरा और नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन पर भी तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
पत्र के माध्यम से पुजारी महासंघ ने एक अन्य गंभीर और तार्किक सवाल भी खड़ा किया है। पदाधिकारियों ने कहा कि कुछ समय पूर्व ‘शाही सवारी’ में प्रयुक्त ‘शाही’ शब्द को मुस्लिम शब्द बताकर उसका कड़ा विरोध किया गया था। इस संदर्भ में महासंघ ने पूछा है कि यदि ‘शाही’ शब्द मुस्लिम है, तो फिर संतों में ‘चादर ओढ़ाने’ की प्रथा हिंदू है या मुस्लिम? महासंघ का तर्क है कि यदि चादर ओढ़ाने की यह प्रथा मुस्लिम है, तो साधु समाज में भी इसे पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए और इस ओर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने पूर्ण विश्वास जताया है कि अखाड़ों से कालनेमी साधुओं और गृहस्थ महामंडलेश्वरों को हटाकर अखाड़ों के पूर्ण शुद्धिकरण के अपने इस अहम संकल्प से अखाड़ा परिषद अध्यक्ष कदम पीछे नहीं हटाएंगे।

Related Articles

Back to top button