धर्म-कर्म

आत्मशोधन का अनूठा प्रयास, गायत्री शक्तिपीठ में ‘डिजिटल उपवास’ और ‘मौन’ के साथ विशिष्ट साधना शिविर का आगाज

गायत्री शक्तिपीठ में 5 राज्यों के साधक कर रहे कठोर तप, 5 दिनों तक रहेगा पूर्ण मौन और सात्विक आहार

उज्जैन। अखिल विश्व गायत्री परिवार केंद्र शांतिकुंज हरिद्वार के मार्गदर्शन में गायत्री शक्तिपीठ उज्जैन पर पांच दिवसीय ‘विशिष्ट साधना सत्र’ का शुभारंभ 14 फरवरी से हो गया है। इस शिविर में कड़े अनुशासन का पालन करते हुए साधक आत्मशोधन की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। यह शिविर अब हर महीने की 14 से 20 तारीख तक आयोजित किया जाएगा।
5 राज्यों के 29 साधक ले रहे भाग
मीडिया प्रभारी डॉ. प्रभु चैधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशिष्ट शिविर में कुल 29 साधक भाग ले रहे हैं, जिसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं। इसमें मध्य प्रदेश से सर्वाधिक 24 साधक, बिहार से 2, तथा उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और राजस्थान से 1-1 साधक शामिल हैं।
मोबाइल वर्जित, डिजिटल उपवास और पूर्ण मौन
शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसका कठोर अनुशासन है। सभी साधक 14 फरवरी की शाम से 19 फरवरी की शाम तक ‘पूर्ण मौन’ व्रत का पालन कर रहे हैं। इस दौरान साधक ‘डिजिटल उपवास’ पर हैं, अर्थात मोबाइल का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। भोजन में भी केवल सात्विक आहार (अन्न) दिया जा रहा है, जिसमें पवित्रता का विशेष ध्यान रखा गया है।
भोर में 4 बजे से शुरू होती है दिनचर्या
साधकों की दिनचर्या अत्यंत व्यवस्थित है। प्रातः 4 बजे जागरण के साथ दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद प्रार्थना, आत्मबोध और आरती का क्रम चलता है। दिन भर में साधक यज्ञ, औषधीय प्रज्ञा पेय का सेवन, जप, नियमित ध्यान, ज्योति अवधारणा ध्यान और डायरी लेखन करते हैं। रात्रि 8.45 बजे तत्वबोध की साधना और प्रार्थना के साथ दिनचर्या समाप्त होती है।
तकनीक और अध्यात्म का संगम
शिविर का संचालन शांतिकुंज हरिद्वार से आई टोली के नायक श्री कुलदीप सिंह राणावत (चित्तौड़गढ़) कर रहे हैं। शक्तिपीठ के व्यवस्थापक जे.पी. यादव और उप जोन प्रभारी प्रभाकर सोनोने के मार्गदर्शन में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संपूर्ण परिसर और साधना कक्षों में ध्वनि प्रसारण (माइक-स्पीकर) की व्यवस्था है, साथ ही वीडियो संदेशों और अमृतवाणी के लिए टीवी स्क्रीन लगाए गए हैं ताकि साधक आचार्य जी के विचारों को आत्मसात कर सकें।
शिवरात्रि पर विशेष अनुष्ठान
शिविर के दौरान महाशिवरात्रि का पर्व भी उल्लास के साथ मनाया गया। साधकों ने पारद शिवलिंगों का निर्माण किया और प्रज्ञाऐश्वर महादेव का अभिषेक-पूजन कर फलाहार ग्रहण किया।
भविष्य की योजनाएं और समापन
इस शिविर का समापन 19 फरवरी की शाम को होगा। 20 फरवरी को साधक उज्जैन के धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर विदा लेंगे। गायत्री परिवार का उद्देश्य इन शिविरों के माध्यम से ‘मानव में देवत्व का उदय’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को प्रबल करना है। आगामी शिविर अयोध्या धाम में 19 मार्च से 27 मार्च तक तथा ओंकारेश्वर में 25 मार्च से 30 मार्च तक लगेंगे।
ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य
इस साधना सत्र में भाग लेने के लिए शांतिकुंज हरिद्वार से अनुमति लेना आवश्यक है। इच्छुक परिजन वेबसाइटए awgp.org पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं। स्थानीय प्रबंधन ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे शिविर का अवलोकन करें और अधिक से अधिक लोगों को इस आत्म-कल्याणकारी साधना के लिए प्रेरित करें।

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