गपशप
उज्जैन के वरिष्ठ रंगकर्मी शरद शर्मा पंजाब में ‘थियेटर कमिटमेंट नेशनल अवार्ड’ से सम्मानित
मंच रंगमंच अमृतसर के 26वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह में मिला सम्मान; 45 वर्षों की रंगयात्रा और समर्पण को किया गया सलाम

उज्जैन। शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी शरद शर्मा को पंजाब के अमृतसर में आयोजित 26वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह में प्रतिष्ठित ‘थियेटर कमिटमेंट नेशनल अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। ‘मंच रंगमंच अमृतसर’ द्वारा आयोजित इस समारोह में शर्मा को यह सम्मान स्वर्गीय गुरु शरण सिंह की स्मृति में प्रदान किया गया।
सम्मान समारोह में मंच रंगमंच के निदेशक केवल धालीवाल ने शरद शर्मा की कला साधना की सराहना की। उन्होंने कहा कि शर्मा ने दुष्यंत की पंक्तियों “कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो” को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया है और वे पिछले 45 सालों से इसी मार्ग पर अग्रसर हैं। शर्मा को ‘कोर्ट मार्शल’, ‘लहरों के राजहंस’ और ‘आषाढ़ का एक दिन’ जैसे नाटकों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा दिलाई है।
इस अवार्ड के महत्व को रेखांकित करते हुए धालीवाल ने बताया कि यह सम्मान इससे पूर्व चंडीगढ़ की नीलम मान सिंह, पश्चिम बंगाल की ऊषा गांगुली, पाकिस्तान की मदीहा गौहर, पंजाब के जितेन्द्र बरार, दिल्ली के प्रोफेसर देवेंद्र राज अंकुर और जम्मू-कश्मीर के बलवंत ठाकुर जैसी प्रख्यात हस्तियों को दिया जा चुका है। इसी गौरवशाली क्रम में अब मध्य प्रदेश के उज्जैन से शरद शर्मा का नाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि शरद शर्मा देश में राष्ट्रीय नाट्य समारोह की शुरुआत करने वाले पहले रंगकर्मी हैं। उन्होंने कलाकारों की एक बड़ी फौज तैयार की है और अपना आधे से अधिक जीवन रंगमंच को समर्पित किया है। संस्था ऐसे कलाकार का सम्मान करते हुए अभिभूत है।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार जसवंत जस ने भी उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे बीते कई वर्षों से शरद शर्मा के नाटकों को यहां देखते आ रहे हैं और उनके इस अद्वितीय समर्पण को सलाम करते हैं।
इस अवसर पर सम्मान स्वरूप शरद शर्मा को शॉल, श्रीफल और 21,000 रुपये की सम्मान राशि भेंट की गई।
सम्मान समारोह में मंच रंगमंच के निदेशक केवल धालीवाल ने शरद शर्मा की कला साधना की सराहना की। उन्होंने कहा कि शर्मा ने दुष्यंत की पंक्तियों “कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो” को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया है और वे पिछले 45 सालों से इसी मार्ग पर अग्रसर हैं। शर्मा को ‘कोर्ट मार्शल’, ‘लहरों के राजहंस’ और ‘आषाढ़ का एक दिन’ जैसे नाटकों ने राष्ट्रीय स्तर पर विशेष प्रतिष्ठा दिलाई है।
इस अवार्ड के महत्व को रेखांकित करते हुए धालीवाल ने बताया कि यह सम्मान इससे पूर्व चंडीगढ़ की नीलम मान सिंह, पश्चिम बंगाल की ऊषा गांगुली, पाकिस्तान की मदीहा गौहर, पंजाब के जितेन्द्र बरार, दिल्ली के प्रोफेसर देवेंद्र राज अंकुर और जम्मू-कश्मीर के बलवंत ठाकुर जैसी प्रख्यात हस्तियों को दिया जा चुका है। इसी गौरवशाली क्रम में अब मध्य प्रदेश के उज्जैन से शरद शर्मा का नाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि शरद शर्मा देश में राष्ट्रीय नाट्य समारोह की शुरुआत करने वाले पहले रंगकर्मी हैं। उन्होंने कलाकारों की एक बड़ी फौज तैयार की है और अपना आधे से अधिक जीवन रंगमंच को समर्पित किया है। संस्था ऐसे कलाकार का सम्मान करते हुए अभिभूत है।
कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार जसवंत जस ने भी उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे बीते कई वर्षों से शरद शर्मा के नाटकों को यहां देखते आ रहे हैं और उनके इस अद्वितीय समर्पण को सलाम करते हैं।
इस अवसर पर सम्मान स्वरूप शरद शर्मा को शॉल, श्रीफल और 21,000 रुपये की सम्मान राशि भेंट की गई।



