उज्जैन दक्षिण में 33 हजार मतदाताओं के नाम कटने पर बवाल तेज
भरत पोरवाल की शिकायत के बाद अब दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र

उज्जैन/भोपाल: उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 217) की मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने का विवाद अब और गहरा गया है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद, अब इस मामले में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने हस्तक्षेप किया है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की सघन जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
दिग्विजय सिंह ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र
राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा को एक पत्र प्रेषित किया है। अपने पत्र में उन्होंने उज्जैन जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल के मूल आवेदन को संलग्न किया है। श्री सिंह ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि उज्जैन दक्षिण विधानसभा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में हुई कथित अनियमितताओं का संज्ञान लें और इसकी जांच कर आवश्यक व समुचित कार्रवाई करें।
क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?
गौरतलब है कि उज्जैन दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एस.आई.आर.) अभियान के दौरान 33,256 मतदाताओं के नाम विलोपित (काटे) गए हैं। एक ही विधानसभा से इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने पर कांग्रेस नेता भरत पोरवाल ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी।
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भेजी गई अपनी शिकायत में पोरवाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
फॉर्म 7 का दुरुपयोग: आरोप है कि नाम काटने की प्रक्रिया में ‘फॉर्म 7’ का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया और झूठी आपत्तियों के आधार पर मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया।
एसडीएम पर पक्षपात का आरोप: शिकायत में सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ/एसडीएम) कृतिका भीमावत की कार्यप्रणाली पर सीधा निशाना साधा गया है। पोरवाल ने रेखांकित किया है कि एसडीएम कृतिका भीमावत, शाजापुर से भाजपा विधायक श्री अरुण भीमावत की पुत्री हैं। आरोप है कि उन्होंने अपने वैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की है।
कलेक्टर की लापरवाही: इस पूरी प्रक्रिया में उज्जैन कलेक्टर श्री रोशन सिंह पर भी लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ही इतनी बड़ी संख्या में नाम काटे जा सके।
21 फरवरी को होना है अंतिम प्रकाशन, निष्पक्ष जांच की मांग
भरत पोरवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से स्पष्ट मांग की है कि 21 फरवरी 2026 को होने वाले मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित एसडीएम और कलेक्टर को हटाकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
इस पूरे प्रकरण की शिकायत कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी की गई थी। अब वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा इस मुद्दे को चुनाव आयोग के समक्ष आधिकारिक रूप से उठाने के बाद, प्रशासन और चुनाव आयोग के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।



