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उज्जैन में सफाई व्यवस्था बदहाल, चूहों के आतंक से शहरवासी बेहाल

नालियों में बहाया जा रहा कचरा, त्योहारों पर भी शहर में रहता है गंदगी का अंबार

उज्जैन। शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। सफाई कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण सड़कें और नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। सफाईकर्मी सड़कों का कचरा सीधे नालियों में बहा रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की नालियां चोक हो गई हैं। सड़कों पर पड़ी मवेशियों और कुत्तों की गंदगी कई दिनों तक नहीं उठाई जाती, जिससे परेशान होकर दुकानदारों को खुद सफाई करनी पड़ रही है।
इंजीनियरों से ज्यादा छुट्टियां, टूट रहा सफाई का ‘सर्कुलेशन’
रहवासियों ने आरोप लगाया कि सफाई कर्मचारियों को माह में चार रविवार के साथ-साथ सभी त्योहारों की छुट्टियां दी जा रही हैं। इतनी छुट्टियां तो अधिकारियों और इंजीनियरों को भी नहीं मिलतीं। त्योहारों पर शहर में लोगों की आवाजाही सबसे अधिक होती है, लेकिन छुट्टियों के कारण पूरे शहर में गंदगी का अंबार लग जाता है। सफाई एक निरंतर प्रक्रिया है। जिस तरह नागदा मिल या श्री सिंथेटिक को एक दिन के लिए भी बंद नहीं किया जा सकता, उसी तरह एक दिन की छुट्टी से सफाई का चक्र (सर्कुलेशन) बुरी तरह बिगड़ जाता है। निगम दावा करता है कि उनके पास छुट्टी के दिनों के लिए अतिरिक्त कर्मचारी हैं, लेकिन धरातल पर ऐसा कोई स्टाफ मौजूद नहीं है।
चंद घंटों की ड्यूटी, चूहों का भारी आतंक
सफाई कर्मचारी दिनभर में मुश्किल से कुछ घंटे काम कर रहे हैं। सुबह 7 से 10 बजे की शिफ्ट वाले कर्मचारी 9 बजे ही गायब हो जाते हैं और शाम को केवल 3 से 4:30 बजे तक काम होता है। इस लचर व्यवस्था के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। वहीं, कंठाल क्षेत्र स्थित परमहंस भोजनालय के आसपास चूहों का भारी आतंक है। रात के समय यहां बड़ी संख्या में चूहे देखे जा सकते हैं। बचाव के लिए लोगों को अपने खर्च पर घरों और दुकानों में जालियां लगवानी पड़ रही हैं। नगर निगम के पास चूहों और मच्छरों की समस्या से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है।
सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करने पर बनाते हैं दबाव
प्रशासनिक लापरवाही का आलम यह है कि यदि कोई नागरिक सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करता है, तो समस्या का समाधान करने के बजाय भारी संख्या में सफाई कर्मचारी एक साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंच जाते हैं और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाते हैं। वहीं, कचरा कलेक्शन गाड़ियों के आने का भी कोई निर्धारित समय नहीं है। सप्ताह में कई दिन गाड़ियां खराब रहती हैं, जिससे मजबूर होकर जनता खाली स्थानों और सड़कों पर कचरा फेंक रही है।

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