सेहतनामा

उज्जैन: 45 साल से मूक-बधिर महिला को मिली ‘बोलने’ की उम्मीद, वैद्य ने शुरू किया निशुल्क उपचार

मरीजों की भारी भीड़ को देखते हुए नाड़ी परीक्षण शिविर 1 मार्च तक बढ़ा, इंदौर का कैंप निरस्त

उज्जैन। महाकाल की नगरी में चल रहे निशुल्क नाड़ी परीक्षण शिविर में मानवता और चिकित्सा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। एलोपैथी से निराश असाध्य रोगों के मरीजों को यहाँ आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से राहत मिल रही है। शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि छोटी धाबरी निवासी 45 वर्षीय अनीता त्रिपाठी का मामला रहा, जो जन्म से न बोल सकती थीं, न सुन सकती थीं।
जन्मजात मूक-बधिर बहन के इलाज का बीड़ा, वैद्य ने नहीं लिया एक भी पैसा
छोटी धाबरी निवासी मनोहर त्रिपाठी अपनी बहन अनीता त्रिपाठी को लेकर शिविर में पहुंचे थे। अनीता पैरों के दर्द से परेशान थीं और जन्म से मूक-बधिर हैं। ‘महाकाल वन मेला 2026’ (जबलपुर) के प्रथम पुरस्कार विजेता वैद्य संतोष आनंद जायसवाल ने न केवल उनके पैरों के दर्द का निवारण किया, बल्कि उनकी बोलने और सुनने की क्षमता वापस लाने के लिए तीन साल का महंगा कोर्स पूरी तरह निशुल्क प्रदान किया। मनोहर त्रिपाठी ने भावुक होकर बताया कि 45 सालों में जो नहीं हुआ, अब उसकी उम्मीद जगी है। वैद्य ने इलाज के पैसे लेने से यह कहते हुए मना कर दिया कि सब कुछ पैसा नहीं होता। उन्होंने आश्वस्त किया है कि तीन महीने के भीतर ही सकारात्मक परिणाम दिखने शुरू हो जाएंगे।
एक खुराक में दर्द गायब, रिपोर्ट नहीं सिर्फ ‘नाड़ी’ देखकर बता रहे बीमारी
मां दुर्गा वन औषधि संजीवनी अनुसंधान के डायरेक्टर संतोष आनंद जायसवाल पिछले 25 वर्षों से बिना किसी जांच रिपोर्ट के केवल नाड़ी देखकर रोगों का सटीक निदान कर रहे हैं। शिविर में कई चमत्कारिक परिणाम सामने आए हैं। नगरकोट निवासी तीन पुत्रों को खो चुकीं और आर्थिक तंगी से जूझ रही लीला बाई गंभीर दर्द और शुगर से पीड़ित थीं, जिन्हें निशुल्क दवा मिलने के बाद अब चलने-फिरने में सक्षम हैं। उनके लकवाग्रस्त पुत्र का इलाज भी निशुल्क करने का आश्वासन दिया गया है। वहीं, गांधी नगर निवासी अजय प्रजापत 6-7 माह से मेरुदंड और कमर दर्द से परेशान थे, जिन्हें मात्र एक दिन की दवा से पूर्ण आराम मिला। सिंधी कॉलोनी निवासी शालिनी के पैरों का गैंग्रीन और शुगर एक सप्ताह के इलाज से नियंत्रित हो गया, जबकि जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग अली मोहम्मद को भी दर्द से बड़ी राहत मिली है।
शिविर अब 1 मार्च तक, इंदौर जाने वाले मरीज उज्जैन आएं
मरीजों की बढ़ती संख्या और भारी दबाव को देखते हुए उज्जैन में चल रहे शिविर की अवधि 5 दिन बढ़ा दी गई है। यह शिविर अब 1 मार्च तक क्षीरसागर गेट स्थित प्रकाश टॉकीज की गली के पास जायसवाल धर्मशाला में जारी रहेगा। वैद्य संतोष आनंद जायसवाल ने बताया कि उज्जैन में अत्यधिक भीड़ के कारण 25 से 30 फरवरी तक इंदौर में प्रस्तावित शिविर को निरस्त कर दिया गया है। इंदौर के मरीज अब उज्जैन आकर ही स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं।
किन रोगों का हो रहा उपचार?
शिविर में लिवर, किडनी, पथरी, माइग्रेन, थायराइड, बवासीर, स्पान्डिलाइसिस, 84 प्रकार के गठियावात, सोरायसिस, सफेद दाग, हृदय रोग, शुगर और गुप्त रोगों का आयुर्वेदिक उपचार किया जा रहा है। शिविर प्रतिदिन सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक संचालित है। पंजीयन हेतु मोबाइल नंबर 9300644113 और 9755703571 पर संपर्क किया जा सकता है।

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