गपशप

कलम जब भी उठाओ साथी, मन में हिंदुस्तान रहे : पं. व्यास

प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा आयोजित राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल को समर्पित भव्य काव्य अनुष्ठान में कवियों ने जगाई देशभक्ति और साहित्य की अलख

कविता ने सदैव जनता के मानस को परिवर्तित किया: कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज

उज्जैन। “जूते फटे पहन लो साथी दिल में स्वाभिमान रहे, कलम जब भी उठाओ साथी मन में हिंदुस्तान रहे…” इन विचारोत्तेजक पंक्तियों के साथ भारत माता की आरती के रचयिता दादा पं. देवकृष्ण व्यास ने प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल को समर्पित काव्य अनुष्ठान में शिखर कलश स्थापित किया। उन्होंने श्रीकृष्ण सरल और प्रेमचंद पर सार्थक रचनाएं सुनाते हुए कहा कि आज अकादमियां और पीठें सरल को याद कर रही हैं, जबकि उनके जीते जी तत्कालीन सत्ताओं ने उनकी उपेक्षा ही की। यदि वे आज होते तो पद्म सम्मान से अलंकृत होते।
कविता ने हमेशा जागरण का काम किया
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि कविता और कवियों ने सदैव जनता के मानस को परिवर्तित किया है। चाहे आजादी का समय हो या वर्तमान का, कविता ने हमेशा जागरण के काम ही किए हैं। उन्होंने इस सारस्वत अनुष्ठान के लिए सभी कवियों को शुभकामनाएं दीं।
कवियों ने अपनी रचनाओं से किया मंत्रमुग्ध
आयोजन में खरगोन से आए वरिष्ठ गीतकार दर्द शुजालपुरी ने “रश्मियां जिसके चेहरे पर केसर मलें, जिसमें घर-घर भगतसिंह जैसे बेटे पलें, वंदनम वंदनम है भुवन भारती” जैसे गीत सुनाकर श्रोताओं को आंदोलित कर दिया। वरिष्ठ व्यंग्य कवि व मध्य प्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र गट्टानी ने अपनी पंक्तियों से झकझोरा- “उसने गर्म जोशी से हाथ मिलाया और मेरी आस्तीन को घूरने लगा, शायद रहने की जगह तलाश रहा था।” वरिष्ठ कवि अशोक भाटी ने भारत भूमि की शान में “इस धरती को रोज रात चांद निहारे, दक्षिण में चरण इसके सागर पखारे…” सुनाकर तालियां बटोरीं।
कवि पत्रकार नरेन्द्र सिंह अकेला ने बेटियों के हक में आवाज उठाते हुए कहा- “मुसीबत बाप पर आई तो बेटे चल दिए घर से, तोड़कर गुल्लक बेटी ने वो राशि बाप को दे दी।” प्रयागराज से आए गीतकार शैलेंद्र मधुर ने सरस गीतों की सस्वर प्रस्तुति दी। ललितपुर उप्र से आईं मंजू कटारे ने आध्यात्मिक गीतों से वातावरण को राममय कर दिया। वहीं, खातेगांव के प. मुकेश मासूम ने हास्य क्षणिकाओं और प्रतिगीतों से उपस्थित समुदाय को गुदगुदाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन हास्य कवि दिनेश दिग्गज ने किया, जिन्होंने अपनी हास्य रचनाओं, शायरियों और गंभीर मुक्तकों से समां बांधा। कार्यक्रम की शुरुआत में सरस्वती वंदना नेहा दुबे ने प्रस्तुत की। अध्यक्षता करते हुए सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के वरिष्ठ सदस्य राजेशसिंह कुशवाह ने श्रीकृष्ण सरल के स्मरण के लिए प्रेमचंद सृजन पीठ को साधुवाद दिया। उन्होंने मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं और प. देवकृष्ण व्यास व दर्द शुजालपुरी सहित सभी कवियों की रचनाओं की भरपूर सराहना की।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की शलाका दीर्घा में संपन्न इस सारस्वत अनुष्ठान में नगर के साहित्यकार और सुधीजन उपस्थित रहे। इनमें मध्य प्रदेश लेखक संघ के अध्यक्ष आचार्य डॉ. हरिमोहन बुधौलिया, विक्रमादित्य शोध पीठ के कार्यकारी निदेशक डॉ. रमण सोलंकी, डॉ. श्रीकृष्ण जोशी, वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, प्राची के अध्यक्ष व व्यंग्यकार शशांक दुबे, डॉ. शेखर मैदमवार, जैन कवि संगम के अध्यक्ष सुगनचंद जैन, हास्य कवि सुरेन्द्र सर्किट, पंडित राहुल शर्मा, डॉ. स्वामीनाथ पाण्डेय, डॉ. मोहन बैरागी, संस्कार भारती के संजय शर्मा, प. प्रबोध पंड्या, वीडी बैंक उपाध्यक्ष राकेश वनवट, केशव पंड्या, डॉ. उर्मि शर्मा, डॉ. पुष्पा चौरसिया, डॉ. प्रीति जोशी, डॉ. हेमलता ओझा, डॉ. नेत्रा रावणकर, संयोगिता जोशी, सरल काव्यांजलि के संतोष सुपेकर, सीमा देवेन्द्र, संगीता तल्लेरा, डॉ. अभिलाषा शर्मा, अनिल पांचाल सेवक, डॉ. रफीक नागौरी, प्रफुल्ल शुक्ल, विक्रम विवेक, कुमार संभव, अभिषेक निगम, दिनेश अनल, श्यामसिंह सिकरवार, महेश त्रिवेदी, अखिलेश द्विवेदी, मानसिंह शरद, जी.के. निगम, मंडलोई और अक्षय चौरे सहित कई गणमान्यजन मौजूद रहे।
प्रारंभ में अतिथियों एवं सम्मानित कवियों का स्वागत प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी ने किया। कार्यक्रम के समापन पर समीक्षात्मक आभार कुलानुशासक आचार्य डॉ. शैलेन्द्रकुमार शर्मा ने व्यक्त किया।

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