खाकी और भू-माफिया के गठजोड़ से हार गया पीड़ित! राष्ट्रपति से मांगी ’इच्छामृत्यु’
15 माह से जेल में बंद निर्दोष ने सिस्टम से तंग आकर मांगी मौत, एसपी को भेजी 14 लोगों के खिलाफ शिकायत

फर्जीवाड़ा : उज्जैन में जमीन के नाम पर कोटा के युवक से ठगी, उलटे पुलिस ने ही लूटा और जेल भेजा; अब राष्ट्रपति से गुहार
उज्जैन। महाकाल की नगरी उज्जैन में भू-माफिया और पुलिस के कथित गठजोड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। न्याय की आस टूटती देख, पिछले 15 महीनों से जेल में बंद एक पीड़ित ने अब महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ’इच्छामृत्यु’ की अनुमति मांगी है। मामला कोटा (राजस्थान) निवासी धनकिशोर उर्फ घनश्याम व्यास से जुड़ा है, जिसने उज्जैन पुलिस के अधिकारियों, उप-पंजीयक और भू-माफियाओं सहित कुल 14 लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पिता के अंतिम संस्कार के लिए मिला था पैरोल
पीड़ित धनकिशोर व्यास (45), जो पिछले 15 माह से उज्जैन जेल में बंद है, हाल ही में अपने पिता के निधन के बाद उच्च न्यायालय से 15 दिन की अंतरिम जमानत पर बाहर आया था। वापस जेल में सरेंडर करने से पहले उसने पुलिस अधीक्षक उज्जैन और राष्ट्रपति को एक भावुक पत्र भेजकर अपनी व्यथा सुनाई है। पीड़ित का आरोप है कि उसके साथ न केवल ठगी हुई, बल्कि पुलिस ने उसे ही झूठे केस में फंसाकर उसका जीवन बर्बाद कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित द्वारा एसपी को भेजे गए इस्तगासा (शिकायत) के अनुसार, सितंबर 2024 में उज्जैन निवासी विक्रम सिंह छाड़ीया और उसके साथियों ने उसे मानपुरा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये की जमीन दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने कहा कि उसे केवल 21 लाख रुपये देने हैं, बाकी लोन हो जाएगा। इसके बाद, अक्टूबर-नवंबर 2024 के बीच आरोपियों ने पीड़ित के बैंक खाते और नकद के रूप में करीब 25 लाख रुपये ले लिए।
4 नवंबर 2024 को भरतपुरी पंजीयन कार्यालय में एक फर्जी रजिस्ट्री करवाई गई, जिसमें पीड़ित को गवाह बनाया गया। बाद में पता चला कि जिस जमीन की रजिस्ट्री रेहाना खान और फरहत हमीद खान के नाम पर हुई और जिसे पीड़ित को देने का वादा किया गया था, उस पर पहले से ही विवाद था और शुभम कुमावत नामक व्यक्ति का कब्जा था। हैरानी की बात यह है कि पंजीयन अधिकारी प्यारेलाल सोलंकी को इस आपत्ति (दिनांक 24/10/24) की जानकारी होने के बावजूद रजिस्ट्री कर दी गई।
पुलिस पर अपहरण और लूट का सनसनीखेज आरोप
धनकिशोर ने आरोप लगाया कि जब उसे ठगी का अहसास हुआ और वह अपने पैसे मांगने उज्जैन आया, तो माधव नगर थाने के एएसआई लक्ष्मीकांत गौतम, आरक्षक संजय बीजामारी और आरक्षक अमरनाथ ने 21 नवंबर 2024 की शाम दशहरा मैदान के पास से उसे पिस्तौल की नोक पर अगवा कर लिया।
आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे एक कमरे में ले गए, जहाँ उसके साथ मारपीट की गई और उसके पास रखे 5 लाख 75 हजार रुपये नकद, सोने की चेन, अंगूठी और कीमती घड़ी लूट ली गई। इसके बाद, अपनी करतूत छिपाने के लिए पुलिस ने भू-माफियाओं (रेहाना खान व फरहत हमीद) को फरियादी बनाकर पीड़ित के खिलाफ ही धोखाधड़ी (अपराध क्र. 611/2024) का झूठा मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया।
जेल जाने के बाद भी नहीं रुकी वसूली
पीड़ित का आरोप है कि जेल जाने के बाद भी पुलिस का खेल खत्म नहीं हुआ। जिन पुलिसकर्मियों ने उसे गिरफ्तार किया था, उन्होंने ही केस में राहत देने के नाम पर पीड़ित के परिवार से 2 लाख रुपये की फिरौती मांगी। डर के मारे परिवार ने 23-24 नवंबर 2024 को डॉली अकोदिया नामक महिला के खाते में 90 हजार रुपये डाले और बाकी 1 लाख 10 हजार रुपये पुलिस ने कोटा जाकर नकद वसूले।
राष्ट्रपति से गुहारः “न्याय नहीं दे सकते तो मौत दे दें“
धनकिशोर ने अपने आवेदन में लिखा है कि झूठे केस में फंसने के कारण वह अपने पिता का इलाज नहीं करा सका, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। उसने मांग की है कि धारा 154(3) के तहत सभी 14 दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए। यदि निष्पक्ष जांच और न्याय नहीं मिल सकता, तो उसे इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। उसने यह भी सवाल उठाया कि यदि फरियादी (भू-माफिया) सच्चे हैं, तो वे पिछले 15 महीनों से कोर्ट में गवाही देने क्यों नहीं आ रहे हैं?
14 लोगों को बताया आरोपी
पीड़ित ने अपने शिकायती आवेदन में 14 लोगों को आरोपी बताया है जिनमें फरहत हमीद खान (इंदौर), रेहाना खान (इंदौर), राशिद पटेल, राजकुमार उर्फ राजू जादम, प्यारेलाल सोलंकी (उप पंजीयन अधिकारी, उज्जैन), हुसैन मलोलावाला, लक्ष्मीकांत गौतम (एएसआई, थाना माधव नगर), आर. अमरनाथ (कांस्टेबल), संजय बीजामारी (आरक्षक), गज्जू गजेन्द्र सिंह (चालक), राकेश कटारिया, तारीख खान, विक्रम सिंह छाड़ीया, डॉली अकोदिया पर आरोप लगाए हैं।


