धर्म-कर्म
चंद्र ग्रहण: महाकालेश्वर मंदिर की पूजा व्यवस्था में बदलाव
3 मार्च को 14 मिनट का रहेगा ग्रहण; सूर्योदय से लगेगा सूतक, भगवान को अर्पित होगा केवल शक्कर का भोग

उज्जैन: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, 3 मार्च मंगलवार को चंद्र ग्रहण के कारण महाकालेश्वर मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार पूजा पद्धति में परिवर्तन रहेगा। शासकीय पुजारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि शाम 6:32 से 6:46 तक रहने वाले इस 14 मिनट के ग्रहण का वेद काल (सूतक) सुबह सूर्योदय से ही प्रारंभ हो जाएगा।
वेद काल लागू होने के कारण सुबह की दद्योदक और भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग अर्पित किया जाएगा। शाम को ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर में शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके पश्चात भगवान के स्नान और पूजन के बाद विधिवत भोग अर्पित कर संध्या आरती संपन्न की जाएगी।



