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डिजिटल परिवर्तन का मुख्य आधार है ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’: प्रो. अर्पण भारद्वाज

सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स का भविष्य: नवाचार और चुनौतियां' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

वक्ताओं ने कहा- स्वचालन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ मिलकर तकनीक तय करेगी नई दिशा
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान संस्थान (आईसीएस) के संगोष्ठी कक्ष में गुरुवार को ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स का भविष्य: नवाचार और चुनौतियां’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह अकादमिक आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ‘पीएम-उषा’ योजना और एमपीकॉन लिमिटेड, भोपाल के विशेष सहयोग से संपन्न हुआ।
स्मार्ट सिटी और शिक्षा में अहम भूमिका
कार्यक्रम के संरक्षक और कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (आईओटी) वर्तमान समय में डिजिटल परिवर्तन का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट शिक्षा, स्मार्ट स्वास्थ्य और स्मार्ट शहरों के विकास में इस तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सह-संरक्षक एवं कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि यह तकनीक उद्योग और अकादमिक जगत के बीच सेतु का कार्य कर रही है, इसलिए विद्यार्थियों को नई तकनीकों के अनुरूप अपने कौशल विकसित करने की आवश्यकता है।
स्टार्टअप और रोजगार के बढ़ेंगे अवसर
मुख्य वक्ता, निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरजीत सिंह गौर ने इस तकनीक के व्यावहारिक उपयोग, स्टार्टअप अवसरों और उद्योग में इसकी बढ़ती मांग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में स्वचालन (ऑटोमेशन), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स का संयोजन तकनीकी क्रांति को एक नई दिशा प्रदान करेगा।
नवाचार के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी मौजूद
मुख्य संयोजक डॉ. उमेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि नवाचारों के साथ-साथ यह तकनीक डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नेटवर्क विश्वसनीयता जैसी चुनौतियां भी प्रस्तुत करती है, जिन पर निरंतर शोध और जागरूकता आवश्यक है। संस्थान के निदेशक डॉ. कमल बुनकर ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अनुसंधान और प्रायोगिक शिक्षण को बढ़ावा देने पर बल दिया।
डॉ. क्षमाशील मिश्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्य व आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला और अंत में सभी का आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने सक्रिय रूप से सहभागिता की। आयोजन समिति के सदस्यों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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