डॉ. गीतांजलि मिश्रा की शोध कृति ‘बुंदेली लोक साहित्य का अनुशीलन’ का विमोचन
लोक संस्कृति को सहेजने का सराहनीय प्रयास, भविष्य के शोधार्थियों का मार्ग प्रशस्त करेगी यह पुस्तक: डॉ. अर्पण भारद्वाज

उज्जैन। ॐ क्लीं महाकाली महाविद्या शक्तिपीठ द्वारा 26 फरवरी को क्षिप्रम् होटल के सभागार में डॉ. गीतांजलि मिश्रा के शोध कार्य पर आधारित ग्रंथ ‘बुंदेली लोक साहित्य का अनुशीलन’ का लोकार्पण किया गया। इस पुस्तक में मुख्य रूप से लोकपर्व, व्रत, त्यौहार और उत्सवों पर केंद्रित बुंदेली लोक कथाओं का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती और राजकुमारी मिश्रा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। वरिष्ठ कवयित्री अनामिका सोनी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जिसमें तबले पर पंडित शैलेंद्र भट्ट और हारमोनियम पर पंडित अजय मेहता ने संगत दी। अतिथियों का स्वागत पंडित राजाराम मिश्रा, मिथिलेश मिश्रा, शक्तिपीठ आचार्य हरगोविंद मिश्रा, भागवत आचार्य पंडित रितेश रावल और पंडित शाश्वत मिश्रा ने किया।
विद्वानों ने की पुस्तक की समीक्षा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज थे। अध्यक्षता हिंदी एवं मालवी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने की। मध्य प्रदेश लेखक संघ की उज्जैन इकाई के अध्यक्ष व पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. हरिमोहन बुद्धोलिया तथा हिंदी विभाग की डॉ. हीना तिवारी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। संस्कृत विदुषी और लेखिका डॉ. पाखुरी वक्त ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा की।
लोक साहित्य का संरक्षण समय की मांग
अपने उद्बोधन में कुलगुरु डॉ. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि आज के समय में लोक साहित्य, लोक कथा, लोक पर्व, लोकगीत और लोक संस्कृति को सहेजने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. गीतांजलि मिश्रा ने अपनी इस कृति के माध्यम से लोक साहित्य को सहेजने का जो कार्य किया है, वह सराहनीय है और आने वाले समय में यह संग्रहणीय कृति शोधार्थियों का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस दौरान डॉ. गीतांजलि मिश्रा ने अपनी कृति और शोध से जुड़े अनुभव उपस्थित विद्वानों के साथ साझा किए।
काव्य गोष्ठी और लेखिका का सम्मान
इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि सतीश श्रीवास्तव ‘सागर’, डॉ. विक्रम परमार ‘विवेक’, हास्य कवि सुरेंद्र सर्किट और डॉ. राजेश रावल ‘सुशील’ ने अपनी कविताओं का पाठ किया। ग्रंथ लोकार्पण के पश्चात ॐ क्लीं महाकाली महाविद्या शक्तिपीठ द्वारा लेखिका डॉ. गीतांजलि मिश्रा को शॉल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र और पुष्प गुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में भूपेंद्र बर्बेले, अंकित तोमर, पंडित रितेश रावल, पंडित मोहित दवे और मोनिका झरिया सहित कई पारिवारिक, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल संचालन मालवी गीतकार डॉ. राजेश रावल ने किया और आभार अनुज शाश्वत मिश्रा ने माना।



