तीन सिंहस्थ बीते, लेकिन 5 रसूखदारों के आगे बेबस प्रशासनः क्या कोयला फाटक-गोपाल मंदिर मार्ग का चौड़ीकरण फिर रह जाएगा अधूरा?
कमरी मार्ग के लिए मुंबई से ला सकते हैं अनुमति, तो यहाँ इच्छाशक्ति क्यों नदारद? जनता ने पूछा- क्या यह अधिकारियों और विरोधियों की मिलीभगत है?

सैकड़ों ने स्वेच्छा से तोड़े पुश्तैनी आशियाने; सरकारी ठेके लेने वाले ही अटका रहे स्मार्ट सिटी का काम, न्यायालय से ’स्टे’ न देने की गुहार
उज्जैन। शहर के सबसे व्यस्त और प्रमुख कोयला फाटक से गोपाल मंदिर मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है। पिछले तीन सिंहस्थ इसी जद्दोजहद में बीत गए, लेकिन महज पांच रसूखदार परिवारों के विरोध के चलते यह अति-महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट आज भी अटका हुआ है। एक ओर जहां आम जनता, व्यापारी और सैकड़ों रहवासी सालों से अपना पूर्ण समर्थन और लिखित सहमति दे रहे हैं, वहीं इन मुट्ठी भर लोगों के आगे प्रशासन बेबस नजर आ रहा है। क्षुब्ध नागरिकों ने अब तीखे सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि यह अधिकारियों और विरोधियों की कोई ’नूराकुश्ती’ (मिलीभगत) है, तो पब्लिक को बेवकूफ बनाना बंद किया जाए।
कमरी मार्ग जैसी इच्छाशक्ति यहाँ क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों ने नेताओं और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कमरी मार्ग का उदाहरण दिया है। उनका कहना है कि जब कमरी मार्ग का चौड़ीकरण करना था, तब प्रशासन ने दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए धर्मगुरु सैय्यदना साहेब से मुंबई जाकर अनुमति प्राप्त कर ली थी। तो क्या अब केवल पांच विरोधियों के कारण महाकाल सवारी के इस मुख्य मार्ग को अधूरा छोड़ दिया जाएगा? जनता का स्पष्ट सुझाव है कि यदि नेताओं और अधिकारियों में सचमुच जनहित की इच्छाशक्ति है, तो वे इन पांच मकानों को छोड़कर बाकी पूरे मार्ग का चौड़ीकरण तत्काल प्रभाव से कर दें, ताकि स्मार्ट सिटी का काम न रुके।
सरकारी लाभ लेते हैं, पर 10 फीट जगह देने को तैयार नहीं
समाजसेवी अरविंद मेदेवाला ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्मार्ट सिटी विजन का मनीष गुप्ता, भरत जैन, अनिल गादिया, सौभागमल गादिया और प्रदीप गादिया द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा है। ये सभी धनाढ्य हैं और इनके मकानों की गहराई 65 से 100 फीट तक है। मनीष गुप्ता का मकान 90 फीट, भरत जैन का 100 फीट और प्रदीप गादिया का मकान 65 फीट गहरा है। इसके बावजूद ये विकास के लिए मात्र 10 फीट जगह देने को तैयार नहीं हैं। हैरानी की बात यह है कि विरोध करने वाले प्रदीप गादिया जैसे लोग कोरोना काल में सैनिटाइजर और बैरिकेड्स निर्माण के सरकारी ठेके लेकर भारी मुनाफा कमा चुके हैं। नागरिकों ने मांग की है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले इन लोगों की संपत्तियों की नपाई हो और आयकर विभाग इनके आय के साधनों की जांच करे। अजय भावे जैसे कई परिवारों ने तो चार साल पहले ही स्वेच्छा से अपने पुश्तैनी मकान और दुकानें तोड़ दी थीं, फिर इन रसूखदारों को छूट क्यों?
1980 का मास्टर प्लान, हादसों में जा चुकी हैं जानें
यह चौड़ीकरण कोई नई मांग नहीं है। वर्ष 1976-80 के मास्टर प्लान में तत्कालीन कलेक्टर बुश ने इसकी आवश्यकता जताई थी। दशकों से अटका यह प्लान अब जाकर 2026 में लागू हो रहा है, लेकिन विरोधियों के कारण पुराने शहर के आठ चौराहों के चौड़ीकरण का पैसा पूर्व में तीन बार से अधिक पास होकर लैप्स हो चुका है। संकरे रास्तों के कारण कंठाल से गोपाल मंदिर तक रोज भीषण ट्रैफिक जाम लगता है जिसमें स्कूली बसें तक फंसती हैं। पूर्व में जर्जर और संकरे मार्गों पर हुए सड़क हादसों में वकील नारायण प्रसाद और दिलीप सक्सेना के पोतों की मृत्यु तथा ठेले से सामान गिरने से एक बच्चे की मौत जैसे गंभीर हादसे हो चुके हैं।
न्यायालय से अपीलः स्टे देने से पहले देखें सीसीटीवी फुटेज
विरोध करने वाले इन रसूखदारों का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह कानूनी दांवपेच में उलझाकर समय नष्ट करना है, ताकि 2028 का सिंहस्थ नजदीक आ जाए और प्रोजेक्ट एक बार फिर ठंडे बस्ते में चला जाए। शहरवासियों ने अब न्यायालय से मार्मिक अपील की है कि इस मामले में कोई भी स्थगन आदेश (स्टे) देने से पहले कंठाल से गोपाल मंदिर तक के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज अनिवार्य रूप से देखे जाएं। कैमरे की रिकॉर्डिंग देखकर यह साफ हो जाएगा कि यहां पब्लिक रोज कितनी बुरी तरह परेशान हो रही है। आम जनता की यही पुकार है कि केवल पांच लोगों के स्वार्थ के चलते शहर के विकास और जनसुविधा की राह न रोकी जाए।



