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तेजी से बदलते परिवेश में भी हमेशा बना रहेगा शालीन हास्य-व्यंग्य का दौर: सुभाष काबरा

मुंबई से पधारे हास्य-व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि सुभाष काबरा का साहित्यकारों और कवियों ने किया सम्मान

उज्जैन। कवियों और साहित्यकारों के बीच गोष्ठी, चौपाल या संवाद जैसे नियमित आयोजनों से काव्य चेतना जीवंत रहती है और नई रचनाएं उभरकर सामने आती हैं। हास्य और व्यंग्य हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। समाज, परिवेश और तकनीक के तेजी से बदलते इस दौर में भी शालीन हास्य-व्यंग्य का महत्व और उसका दौर हमेशा बना रहेगा। यह विचार मुंबई चौपाल के सुकवि, संचालक, फिल्म व सीरियल लेखक तथा केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सदस्य सुभाष काबरा ने व्यक्त किए। वह गोवर्धन धाम में आयोजित अपने सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुंबई से पधारे हास्य-व्यंग्य के सुप्रसिद्ध कवि सुभाष काबरा का स्थानीय साहित्यकारों और कवियों ने उनकी दीर्घकालीन रचनात्मक यात्रा के लिए शॉल, श्रीफल और अंगवस्त्र भेंट कर आत्मीय सम्मान किया। इस अवसर पर प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी, प्रख्यात कवि अशोक भाटी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पिलकेंद्र अरोरा, मध्यप्रदेश लेखक संघ के सचिव डॉ. हरीशकुमार सिंह, जैन राष्ट्रीय कवि संगम के प्रदेश अध्यक्ष सुगनचंद जैन, बैंक कर्मियों की साहित्य संस्था ‘प्राची’ के अध्यक्ष शशांक दुबे, वृक्ष मित्र श्याम माहेश्वरी और ऋषि मुनि प्रकाशन के पुष्कर बाहेती ने सुभाष काबरा का अभिनंदन किया।
कार्यक्रम के दौरान कवि सम्मेलनों की वर्तमान स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस मौके पर सुभाष काबरा ने प्रख्यात व्यंग्यकार स्व. शरद जोशी के साथ मुंबई में बिताए अपने समय को याद किया और उनसे जुड़े कई रोचक संस्मरण श्रोताओं के साथ साझा किए। समारोह में पुष्कर बाहेती ने ऋषि मुनि प्रकाशन की ओर से प्रकाशित तीन पंचांग भी भेंट किए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. हरीशकुमार सिंह ने किया, जबकि आभार मुकेश जोशी ने माना।

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