दतिया में भिक्खु प्रशिक्षण शिविर का समापन, अप्रैल में बोधगया में होगी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी
भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की परियोजना के तहत भिक्खुओं ने सीखे थेरवाद के 227 नियम और विपश्यना

उज्जैन। भारत-श्रीलंका फाउंडेशन के तत्वावधान में दतिया में आयोजित भिक्खु खुद्दक (लघु) प्रशिक्षण शिविर का गरिमामय समापन हुआ। इस शिविर में दो दर्जन से अधिक बौद्ध भिक्खुओं ने थेरवाद के 227 विनय नियमों, विपश्यना साधना और दैनिक जीवन में प्रयुक्त होने वाले सुत्त का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
परियोजना प्रभारी भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो उज्जैन ने बताया कि शिविर में भाग लेने वाले सभी भिक्खुओं और उपासकों के लिए फाउंडेशन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए थे। डॉ. सुमेध थेरो द्वारा सभी प्रतिभागियों के लिए आवास, भोजन, यातायात, दान और पठन-पाठन के लिए आवश्यक पुस्तकें व पुस्तिकाओं की संपूर्ण व्यवस्था निःशुल्क की गई, ताकि प्रशिक्षण में कोई बाधा न आए।
डॉ. थेरो ने बताया कि धर्म प्रचार की शृंखला में 2 से 12 अप्रैल 2026 तक झांसी के उपाली राजगृह बुद्ध विहार पर अगला शिविर लगेगा। इसके बाद 20 से 29 अप्रैल 2026 तक बोधगया में भारतीयों के लिए प्रशिक्षण शिविर और 30 अप्रैल को विशाल संगोष्ठी होगी। डॉ. सुमेध थेरो ने उज्जैन सहित देशभर के बौद्ध भिक्खुओं और उपासकों को बोधगया में आमंत्रित किया है। संगोष्ठी के लिए हिंदी और अंग्रेजी में लेख भी आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें बाद में पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाएगा।
समापन अवसर पर शीलरतन महाथेरो, सम्पूर्णानन्द थेरो, विश्व ज्योति थेरो, उपाली महाथेरो, भिक्खु धर्मप्रिय, समयक बोधी, भिक्खु गिरिमानंद, सूर्या बौद्ध, भिक्खु विनय शील, डॉ. करुणा सागर, भिक्खु जगतानंद, भिक्खु मेधानकर और भिक्खु दीपरतन थेरो सहित राजाबेटी, भगवान दास, हरीराम, कंचनादेवी व सैकड़ों उपासक मौजूद रहे।



