दिल्ली में ‘वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट 2026’: वैश्विक मंच पर चमका उज्जैन का छात्र, सौरभ चौधरी ने कृषि नवाचार और खाद्य सुरक्षा पर रखे विचार
छोटे किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर दिया जोर

नई दिल्ली के ताज पैलेस में ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’ द्वारा आयोजित ‘वर्ल्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट समिट 2026’ का हाल ही में समापन हुआ। इस प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन में उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के छात्र सौरभ चौधरी ने भी अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। उन्होंने देश-विदेश के दिग्गज नीति-निर्माताओं और पर्यावरण विशेषज्ञों के सामने कृषि नवाचारों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।
शिखर सम्मेलन के विशेष सत्र ‘युवा भागीदारी और नीति नवाचार’ में सौरभ ने सतत कृषि (सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) और जलवायु-लचीली (क्लाइमेट-रेसिलिएंट) खेती की आधुनिक तकनीकों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक समाधान पहुंचाकर ही भविष्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। वैश्विक मंच पर सौरभ की इस उपस्थिति ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय शिक्षण संस्थानों के युवा जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर विमर्श में अपनी सक्रिय और अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
सम्मेलन में इन 3 प्रमुख मुद्दों पर हुआ मंथन:
जलवायु परिवर्तन और नेट-जीरो: कार्बन उत्सर्जन को तेजी से कम करने के उपायों और भविष्य के स्वच्छ ईंधन के रूप में ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ के महत्व पर विस्तृत चर्चा की गई।
(लाइफ) आंदोलन: भारत की वैश्विक पहल ‘लाइफ स्टाइल फॉर एन्वायरमेंट’ (पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली) को विश्व स्तर पर एक बड़े जन-आंदोलन में बदलने की अपील की गई।
सर्कुलर इकोनॉमी: कचरा प्रबंधन (अपशिष्ट प्रबंधन) को बेहतर बनाने और पर्यावरण के अनुकूल काम करने वाले हरित स्टार्टअप्स (ग्रीन स्टार्टअप्स) को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीतियां साझा की गईं।
ग्लोबल स्थिरता के लिए वित्त और नवाचार का साथ आना जरूरी
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिखर सम्मेलन में गुयाना के उपराष्ट्रपति महामहिम भरत जगदेव और भारत के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव सहित दुनिया भर के कई प्रमुख नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का समापन इस महत्वपूर्ण संदेश के साथ हुआ कि आने वाले दशक में वैश्विक पर्यावरण स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए वित्त (फंडिंग), नवाचार (इनोवेशन) और समुदाय-आधारित कार्यों का एक मंच पर आना बेहद अनिवार्य है।



