नव संवत्सर पर जैन कवि संगम की काव्य गोष्ठी संपन्न
'नी अड़वा की, नी लड़वा की, बधाई गुड़ी पड़वा की...' रचनाओं ने बांधा समां

उज्जैन। नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा के शुभ अवसर पर जैन कवि संगम द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी रहे, जबकि अध्यक्षता जैन कवि संगम के प्रदेश अध्यक्ष सुगनचंद जैन ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन कर किया गया। प्रारंभ में डॉक्टर खुशबू बाफना ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत सुगनचंद जैन और संगीता तल्लेरा ने किया। इस अवसर पर उपस्थित सभी कवियों और कवयित्रियों का सम्मान भी किया गया।
कवियों ने दी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां
गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी शानदार कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉक्टर अर्चना बाफना ने ‘मेरा वतन है हिंदुस्तान, जिसमें बसती मेरी जान’, डॉ अमरीश जैन ने ‘अपने पराए जो बिछड़े थे रंग भरे चेहरे में मिले’ और राकेश खेमसरा ने ‘मुझे भी अपना बचपन याद आता है, जहां खेले थे कूदे थे वह आंगन याद आता है’ का पाठ किया।
संगीता तल्लेरा ने ‘जो खोकर भी मिल जाता है वह असली खुशी देकर जाता है’, सुदीप जैन ने ‘कल खो दिया आज के लिए और आज खो दिया कल के लिए’, दिलीप जैन ने ‘एक नन्हा सा फूल खिला सारा उपवन महकने लगा’ और राकेश चौरडिया ने ‘नई उमंगों नई तरंगों संकल्पों का दिन, आया नए साल का दिन’ रचना प्रस्तुत की।
अनिल पांचाल सेवक ने अपनी मालवी रचना ‘नी अड़वा की, नी लड़वा की, बधाई गुड़ी पड़वा की’ सुनाकर खूब दाद बटोरी। योगेंद्र बैनाड़ा ने ‘सारे सत्संग सारे प्रवचन सुनकर व्यर्थ किया, शांति और समता को छोड़कर बात-बात में क्रोध किया’ और सुगनचंद जैन ने ‘नए साल में खुशियां सबके जीवन में हर पल हो, पलकें भी हों गीली गर तो खुशियों का ही जल हो’ प्रस्तुत कर वातावरण को खुशनुमा बना दिया।
बफेट व्यवस्था पर कसा तंज
गोष्ठी में मुख्य अतिथि मुकेश जोशी ने वर्तमान बफेट व्यवस्था पर अपना तीखा व्यंग्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन योगेंद्र बैनाड़ा ने किया तथा आभार प्रदर्शन राकेश चौरडिया ने किया।



