निजीकरण के विरोध में थमेगा बीमा कंपनियों का कामकाज, एलआईसी दफ्तरों में लटकेंगे ताले
12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल, उज्जैन संभाग में भी दिखेगा व्यापक असर, विनिवेश और एफडीआई के खिलाफ शाखाओं के बाहर होगा प्रदर्शन

उज्जैन। केंद्र सरकार की निजीकरण, विनिवेश और कथित श्रम विरोधी नीतियों के खिलाफ बीमा क्षेत्र के कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघों के संयुक्त आह्वान पर 12 फरवरी गुरुवार को भारतीय जीवन बीमा निगम और सार्वजनिक क्षेत्र की अन्य बीमा कंपनियों के कर्मचारी एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे।
इस हड़ताल का व्यापक असर उज्जैन संभाग में भी देखने को मिलेगा। इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन, उज्जैन शाखा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गुरुवार को सभी अधिकारी और कर्मचारी कार्य से विरत रहेंगे, जिससे बीमा कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप रहने की संभावना है।
यूनियन के नेताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियां न केवल कर्मचारियों, बल्कि करोड़ों पॉलिसीधारकों और लाखों अभिकर्ताओं के हितों के खिलाफ हैं।
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
विनिवेश पर रोकः एलआईसी और सरकारी बीमा कंपनियों में विनिवेश की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए।
एफडीआई का विरोधः बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति वापस ली जाए।
नई भर्तियांः आउटसोर्सिंग बंद कर रिक्त पदों पर पक्की और स्थायी भर्तियां की जाएं।
श्रम कानूनः श्रम कानूनों में किए जा रहे कर्मचारी विरोधी संशोधनों को रद्द किया जाए।
शाखाओं के बाहर होगा प्रदर्शन
प्रशांत सोहले द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उज्जैन में हड़ताल को सफल बनाने के लिए अनिल कुरेल, कुलदीप सिंह और दीपिका सक्सेना ने सभी साथियों से एकजुट होने का आह्वान किया है। यूनियन का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उन्हें कमजोर करना आम जनता की सामाजिक सुरक्षा पर सीधा हमला है। हड़ताल के दौरान शहर की विभिन्न शाखाओं के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सभाएं आयोजित कर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
