समाज संसार

निरंकारी भक्तों ने भूखी माता घाट पर चलाया स्वच्छता अभियान, दिया ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ का संदेश

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की प्रेरणा से देशभर के 1500 जल तटीय स्थलों पर हुआ आयोजन, नगर निगम के सहयोग से कचरे का हुआ निपटान

 

उज्जैन। संत निरंकारी मिशन उज्जैन द्वारा रविवार को ‘अमृत परियोजना’ के तहत भूखी माता घाट पर एक वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के माध्यम से समाज को ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ का सार्थक संदेश दिया गया। जल संरक्षण और स्वच्छता का यह पुनीत कार्य सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज की पावन प्रेरणा से देशभर के लगभग 1500 जल तटीय स्थलों पर एक साथ आयोजित किया गया।


मीडिया सहायक विनोद गज्जर ने जानकारी देते हुए बताया कि उज्जैन में इस स्वच्छता अभियान की शुरुआत सुबह 7 बजे हुई। लगातार तीन घंटे तक चले इस अभियान में निरंकारी भक्तों और सेवादल के महात्माओं ने पूरे उत्साह, पूर्ण समर्पण और सेवा भाव के साथ भूखी माता घाट से लेकर विश्राम घाट तक व्यापक स्तर पर सफाई की। इस दौरान घाटों और आसपास के क्षेत्रों से भारी मात्रा में कचरा और प्लास्टिक एकत्रित किया गया। अभियान में सराहनीय सहयोग के लिए मिशन द्वारा उज्जैन नगर निगम के विजय माली का विशेष आभार व्यक्त किया गया।
उज्जैन के मुखी त्रिलोक बेलानी ने इस अवसर पर बताया कि ‘अमृत परियोजना’ का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण और स्वास्थ्य के प्रति स्थानीय जनता के बीच जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने बताया कि निरंकारी भक्तों द्वारा घाटों से इकट्ठा किए गए भारी मात्रा में कचरे को नगर निगम की टीम अपने वाहनों में भरकर ले गई। इस त्वरित सहयोग के लिए मिशन की ओर से नगर निगम प्रशासन का धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ ही सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के प्रति भी आभार जताया गया।
स्वच्छता अभियान के समापन अवसर पर घाट किनारे एक सत्संग का आयोजन भी किया गया। इसमें निरंकारी आशा चौहान ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का संदेश वाचन किया। इस दौरान मधुर भजनों, सामूहिक गान, जागरूकता संगोष्ठी और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जल जनित रोगों और स्वच्छता के महत्व पर जनचेतना जागृत की गई। सत्संग में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि हमें अपनी धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए पहले से अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजो कर रखना है। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान इसी पावन संकल्प का प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए एक परिपूर्ण भविष्य की ओर मार्गदर्शन करता है। यह स्मरण कराया गया कि जब मन निर्मल होता है तभी प्रकृति भी स्वच्छ होती है और जब सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, तभी सही मायनों में समाज का नवनिर्माण होता है।

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