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पश्चिम से पूर्व तक भारत नापने निकलीं आशा मालवीय, उज्जैन में हुआ स्वागत
युवा अपने सपनों को पहचानें और आत्मविश्वास से आगे बढ़ें – आशा मालवीय

उज्जैन। देश में महिलाओं के सशक्तिकरण और जागरूकता का संदेश देने के लिए लंबी साइकिल यात्रा पर निकलीं सोलो साइकिलिस्ट आशा मालवीय शनिवार को उज्जैन पहुंचीं। यहाँ सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की कंप्यूटर साइंस अध्ययनशाला में उनका आत्मीय स्वागत किया गया।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज, शासकीय माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. कल्पना सेंगर, डॉ. बुनकर, डॉ. जीवन सिंह सोलंकी, डॉ. लोकेश लढाणी, डॉ. देशवाली और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। साथ ही सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल के अध्यक्ष उत्कर्ष सिंह सेंगर और सदस्य तुषार पिल्लैवार ने आशा मालवीय का स्वागत कर उनका उत्साह बढ़ाया।
शारीरिक शक्ति की परीक्षा ही नहीं, जागरूकता का माध्यम भी
आशा मालवीय भारत के पश्चिम से पूर्व तक की लंबी यात्रा कर रही हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल शारीरिक शक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि महिलाओं को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है।
उन्होंने युवाओं, विशेषकर लड़कियों को संदेश देते हुए कहा कि उनकी इस यात्रा की सबसे बड़ी प्रेरणा यही है कि युवा अपने सपनों को पहचानें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।



