भाजपा नेता पर गर्भवती महिला के घर घुसकर पिस्टल तानने और पेट में लात मारने का आरोप, पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
पीड़िता का आरोप- 6 हफ्ते का गर्भ था, लात मारने से हुई ब्लीडिंग
उज्जैन। शहर के नागझिरी थाना क्षेत्र में एक गर्भवती महिला ने भाजपा नेता और उसके साथियों पर घर में घुसकर जानलेवा हमला करने और लूटपाट का आरोप लगाया है। मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब पीड़िता और एक पुलिसकर्मी के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सामने आया, जिसमें पुलिसकर्मी पीड़िता के दर्द को ‘नाटक’ बताता सुनाई दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
जिला अस्पताल में भर्ती पीड़िता किरण बंजारा (निवासी नागझिरी) ने अपनी शिकायत में बताया कि भाजपा नेता सोनू कछवाय अपने गुंडों और एक महिला साथी के साथ उनके घर में जबरन घुस आया। उस वक्त घर में तीन महिलाएं, तीन छोटे बच्चे और एक हेड इंजरी का मरीज मौजूद था।
आरोप है कि सोनू कछवाय ने घर में घुसते ही पिस्टल तान दी और महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें कीं। विरोध करने पर आरोपियों ने किरण को पकड़ लिया और उसके पेट में लात-घूंसे मारे। पीड़िता का कहना है कि वह 6 सप्ताह की गर्भवती है और पेट में लात पड़ने के कारण उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई है, जिससे गर्भपात का गंभीर खतरा बना हुआ है।
लूटपाट और धमकी का आरोप
शिकायत के अनुसार, आरोपी जाते समय घर से कार की चाबी, गले से मंगलसूत्र और अलमारी में रखे 35,000 रुपये नकद लूट ले गए।
वायरल ऑडियो ने खोली पोल
घटना के बाद पीड़िता ने जब नागझिरी थाने के पुलिसकर्मी (संजय) को फोन किया, तो दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। वायरल ऑडियो में:
पीड़िता पुलिस पर आरोप लगा रही है कि भाजपा नेता होने के कारण पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
जब पीड़िता ने कहा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, तो पुलिसकर्मी ने जवाब दिया, “जानबूझकर नाटक मत करो।”
ऑडियो में एक जगह पुलिसकर्मी यह कहता सुनाई दे रहा है, “जिससे पैसे लिए उसी के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध…” जिस पर पीड़िता ने पलटवार करते हुए पूछा, “क्या यह आपका नियम है कि पैसे लो और महिलाओं को मारने दो?”
पुलिसकर्मी ने यह भी संकेत दिया कि पीड़िता पक्ष के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस पर राजनीतिक दबाव का आरोप
किरण बंजारा का कहना है कि उन्होंने सीएम हेल्पलाइन (181) पर भी शिकायत की थी, लेकिन स्थानीय पुलिस प्रशासन राजनेताओं के दबाव में काम कर रहा है। घटना के बाद पूरा परिवार दहशत में है और जिला अस्पताल में उपचाररत है। पुलिस ने अभी तक मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की है।
जिम्मेदारों का मौन
गंभीर आरोपों और मेडिकल इमरजेंसी के बावजूद, पुलिस द्वारा पीड़िता को ‘नाटक’ करने की बात कहना और पिस्टल बरामदगी पर कोई ठोस जवाब न देना पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं।



