धर्म-कर्म
महर्षि दयानंद ने अज्ञान के अंधकार को मिटाकर सच्चे शिव की राह दिखाई: प्रो. अशोक वेदालंकार
आर्य समाज मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मनाया गया ऋषि बोधोत्सव

उज्जैन। महाशिवरात्रि के पावन पर्व को आर्य समाज उज्जैन द्वारा ‘ऋषि बोधोत्सव’ के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय आर्य समाज मंदिर में आयोजित समारोह में वक्ताओं ने महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन और उनके द्वारा दिखाए गए सत्य के मार्ग पर प्रकाश डाला।
सत्य के लिए महर्षि का बलिदान अविस्मरणीय
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और गुरुकुल कांगड़ी के स्नातक आचार्य अशोक वेदालंकार ने कहा कि सत्य का समर्थन सभी महापुरुषों ने किया, लेकिन महर्षि दयानंद ने सत्य के लिए मान-अपमान से परे होकर स्वयं का बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षा के बाद ही संस्कार और व्रत के संकल्प से श्रद्धा आत्मसात होती है। महर्षि दयानंद ने अपने गुरु को दिए वचन को जीवन भर निभाया। उन्होंने आजीवन अज्ञान, अविद्या, पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों को दूर कर समाज को ‘वेदों की ओर लौटो’ का संदेश दिया और सच्चे शिव के स्वरूप को परिभाषित किया।
वेद और शिव एक दूसरे के पर्याय
वेदों में शिव तत्व की व्याख्या करते हुए आचार्य जीवन प्रकाश ने कहा कि मनुष्य के अनेक मन होते हैं जो अलग-अलग यात्राएं करते हैं, परंतु जो मन आत्मा के अधीन हो, वही ‘शिव संकल्प’ वाला जाग्रत मन है। उन्होंने बताया कि वेद और शिव पर्याय हैं, अर्थात दोनों ही संपूर्ण प्रकृति के कल्याणकारी हैं। वहीं, आचार्य धर्मदेव जी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमने अपने वैदिक धर्म और सत्य ज्ञान के बोध को विस्मृत कर दिया है। महर्षि का यह बोधोत्सव हमें अपने कर्तव्यों के प्रति पुनः जागृत करने का पर्व है।
यज्ञ और भजनों से गूंजा प्रांगण
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव महायज्ञ में आहुतियां देकर किया गया। इसके पश्चात मदनलाल कुमावत ने ईश प्रार्थना की, जबकि तनिष्क वाडिया और श्रीमती संपत पाटीदार ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी। पंडित राजेंद्र व्यास ने स्वागत भाषण और वैदिक राष्ट्रीय प्रार्थना प्रस्तुत की।
अतिथियों का सम्मान
समारोह में अतिथियों का स्वागत पूर्व प्रधान राजेंद्र शर्मा, सुरेश पाटीदार, वेदप्रकाश आर्य, ओमप्रकाश यादव और स्वप्निल व्यास ने ‘ओम्’ अंकित उपवस्त्र भेंट कर किया। कार्यक्रम का संचालन श्री विष्णु शर्मा ने किया और अंत में प्रधान ललित नागर ने आभार व्यक्त किया। वैदिक जयघोष और शांति पाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर के गणमान्य नागरिक और आर्यजन उपस्थित थे।



