कंट्रोवर्शियल
महाकाल गर्भगृह प्रवेश: देश के पुजारियों को मिले अनुमति या साधु-संतों पर भी लगे प्रतिबंध
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने जिलाधीश को लिखा पत्र, साधु-संतों के प्रवेश पर उठाए गंभीर सवाल

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश को लेकर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। महासंघ ने मांग की है कि गर्भगृह में या तो देश के प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिरों के पुजारियों को भी जल चढ़ाने की अनुमति दी जाए, या फिर साधु-संतों के प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। इस संबंध में महासंघ के नगर अध्यक्ष मंगल पुजारी ने जिलाधीश महोदय को पत्र भेजा है।
महासंघ का आरोप है कि महाकालेश्वर मंदिर गर्भगृह में प्रवेश बंद होने के बावजूद कई साधु-संत अपने पदों का दुरुपयोग कर अंदर प्रवेश कर रहे हैं जो अनुचित है। पत्र में कहा गया है कि ये साधु-संत सनातन धर्मावलंबियों द्वारा सर्वमान्य नहीं होते, बल्कि वे केवल अपने अखाड़ों द्वारा नियुक्त होते हैं और अपनी निजी जमीन खरीदकर मठ आश्रम बनाकर रहते हैं। महासंघ ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि समाचार पत्रों के माध्यम से कई साधु-संतों पर गंभीर आपराधिक मामलों से लेकर यौन शोषण तक के आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे साधु-संत महाकाल गर्भगृह में जाने योग्य नहीं हैं।
नगर अध्यक्ष मंगल पुजारी ने पत्र में बताया है कि यदि निजी अखाड़ों द्वारा घोषित साधु-संतों और महामंडलेश्वरों को गर्भगृह में जाने की अनुमति दी जा सकती है, तो शासन द्वारा नियुक्त पुजारियों को क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि साधु-संतों को शासन की व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं होता और वही लोग अक्सर प्रशासन की सार्वजनिक व्यवस्था को सबसे ज्यादा कोसते नजर आते हैं।
इसके विपरीत, पुजारी वर्ग सदैव शासन-प्रशासन का सहयोग करता है और सनातन धर्मावलंबियों द्वारा सर्वमान्य होता है। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि ऐसे पुजारियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जाना धर्मानुसार उचित नहीं है, इसलिए प्रशासन को इस व्यवस्था में समानता लानी चाहिए।



