महाकाल मंदिर संध्या और शयन आरती में 250 रुपए शुल्क लगाने पर बवाल, कांग्रेस ने कहा- दर्शन को आय का साधन बना रही सरकार
कांग्रेस का कड़ा विरोध, कहा दान स्वैच्छिक होता है, भाजपा ने मंदिर को व्यापार, व्यवसाय का केंद्र बना दिया

ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर अपराध बढ़ेंगे, पहले भी कई जेल जा चुके
उज्जैन। श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती की तर्ज पर अब संध्या आरती और शयन आरती दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग होगी, जिसके लिए भक्तों को 250-250 रुपए प्रति व्यक्ति चुकाने होंगे। मंदिर समिति के इस फैसले के बाद अब शहर में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। कांग्रेस ने इस सशुल्क दर्शन व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी एवं नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने इस फैसले को लेकर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि मंदिर समिति ने दर्शन और अन्य सभी व्यवस्थाओं को धीरे-धीरे आय का साधन बना दिया है। आपने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर अनेक प्रकार के अपराध और अनियमितताएं होने की आशंका है। पूर्व में भी भस्म आरती को लेकर रात 11-11 बजे तक टिकट जारी करने जैसी अनियमितताएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोग जेल तक जा चुके हैं।
मुकेश भाटी, रवि राय ने कहा कि भगवान महाकाल के मंदिर में दर्शन और दान पूरी तरह से स्वैच्छिक होना चाहिए। श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार जो भी दान करना चाहें, वह दान पेटी में डालें। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मंदिर को व्यापार और व्यवसाय का केंद्र बना दिया है। कांग्रेस पार्टी भस्म आरती के बाद अब शयन और संध्या आरती के नाम पर दर्शनार्थियों से की जा रही इस वसूली का कड़ा विरोध करती है। इसके साथ ही, इस संबंध में कांग्रेस पार्टी शीघ्र ही अपने वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तैयार करेगी।
मुकेश भाटी एवं रवि राय ने इस निर्णय के लिए अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवालिया निशान लगाए हैं। उन्होंने प्रशासन से पूछा है कि क्या प्रशासक द्वारा लिए गए इस निर्णय का श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने विधिवत अनुमोदन किया है? क्या शहर के भाजपा विधायकों, सांसद और प्रभारी मंत्री से इस फैसले को लेकर सहमति ली गई है? यह निर्णय किस आधार पर और किसकी सलाह पर लिया गया, इसे तुरंत सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
रोज 10 लाख अतिरिक्त कमाने की ‘लूट’ और बिना ऑडिट का हिसाब
कांग्रेस नेता रवि राय ने मंदिर समिति के इस फैसले को दर्शन के नाम पर सीधे ‘लूट-पाट’ करार दिया है। उन्होंने इसका गणित समझाते हुए बताया कि यदि शयन आरती के लिए 2000 लोगों को और संध्या आरती के लिए भी 2000 लोगों को अनुमति दी जाती है, तो 250 रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से दोनों आरतियों से प्रतिदिन 5-5 लाख रुपए की वसूली होगी। इस तरह मंदिर समिति भस्म आरती की तरह ही प्रतिदिन 10 लाख रुपए अतिरिक्त कमाने की योजना बना रही है। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि दान के रूप में आ रहे इतने भारी-भरकम पैसे का मंदिर समिति कभी भी सार्वजनिक ऑडिट नहीं करवाती है, जिससे यह पता ही नहीं चलता कि यह पैसा कहाँ जा रहा है।
वीआईपी दर्शन के नाम पर पहले भी हो चुके हैं बड़े खुलासे
नई सशुल्क व्यवस्था का विरोध इसलिए भी हो रहा है क्योंकि पूर्व में दर्शन के नाम पर मंदिर में कई घोटाले सामने आ चुके हैं। दिसंबर 2024 में ही उज्जैन कलेक्टर ने वीआईपी दर्शन (प्रोटोकॉल दर्शन) के नाम पर हो रही अवैध वसूली का रंगे हाथों खुलासा किया था। नंदी हॉल और महाकाल की चौखट के दर्शन कराने के नाम पर श्रद्धालुओं से 1100 से 2100 रुपए तक की अवैध वसूली की जा रही थी। इस मामले में कलेक्टर की कार्रवाई के बाद 6 कर्मचारियों (जिनमें पुरोहित और सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे) को निलंबित कर उनके खिलाफ महाकाल थाने में 3 एफआईआर दर्ज करवाई गई थीं। जांच में यह भी सामने आया था कि मंदिर कर्मचारियों के खातों में लाखों रुपए के संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए थे।


