महाशिवरात्रि पर रामेश्वर महादेव मंदिर में हुआ भव्य सामूहिक कालसर्प दोष महापूजन, अमेरिका से ऑनलाइन जुड़े भक्त
रामेश्वर महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कालसर्प दोष निवारण अनुष्ठान संपन्न, विदेशों से भी जुड़े श्रद्धालु

उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में महाशिवरात्रि का पर्व पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। बाबा महाकाल की नगरी में शिप्रा तट स्थित प्राचीन रामेश्वर महादेव मंदिर में इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। रामेश्वर महादेव एवं विराट हनुमान भक्त मंडल के तत्वावधान में पंडित डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ल एवं पंडित आर्यन शुक्ल के आचार्यत्व में भव्य सामूहिक कालसर्प दोष महापूजन का आयोजन किया गया।
विदेशों से ऑनलाइन जुड़े भक्त
इस अनुष्ठान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें न केवल देश के विभिन्न कोनों से, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। तकनीक के माध्यम से अमेरिका से प्रगति उपाध्याय ने ऑनलाइन जुड़कर पूजन विधि संपन्न की, जबकि यहाँ मंदिर में उनके माता-पिता उपस्थित रहे।
रामेश्वर महादेव का हुआ विशेष श्रृंगार
महापर्व की शुरुआत सुबह रामेश्वर महादेव के पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन के साथ हुई। लगभग 4 घंटे तक चले इस कालसर्प दोष महापूजन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गईं। शाम को भगवान रामेश्वर महादेव का दूल्हे की तरह आकर्षक श्रृंगार कर सेहरा सजाया गया और महाआरती की गई। समापन पर पंडित शुक्ल द्वारा भक्तों को आशीर्वाद स्वरूप रुद्राक्ष एवं यंत्र भेंट किए गए।
मंदिर की पौराणिक मान्यता
पंडित डॉ. विशाल लक्ष्मीकांत शुक्ल ने बताया कि अवंतिका में स्थित रामेश्वर महादेव का शिवलिंग विश्व का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है, जो अपनी धुरी पर चारों दिशाओं में घूमता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी।
कालसर्प दोष और उसका निवारण
पंडित शुक्ल ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष को संघर्षपूर्ण माना गया है। जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं, तब यह योग बनता है, जिससे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता है। महाशिवरात्रि और नागपंचमी जैसे पर्वों पर उज्जैन जैसी देवभूमि में इस दोष का निवारण करने से जातक को शीघ्र लाभ मिलता है और बाबा महाकाल के आशीर्वाद से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।



