पाठशाला

राष्ट्र निर्माण केवल निर्माण कार्य नहीं, सभी को साथ लेकर संतुलित विकास करना है: डॉ. साहू

सम्राट विक्रमादित्य विवि में इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष का व्याख्यान; कहा- शोध में सामाजिक संदर्भ समझना जरूरी

उज्जैन | राष्ट्र निर्माण की दिशा में हर प्रयास अकादमिक के साथ-साथ नीति एवं योजना के स्तर पर भी अंतर्विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) होना चाहिए। राष्ट्र की प्रगति केवल भौतिक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि देश के सभी समूहों को साथ लेकर संतुलित विकास की भावना का होना है। यह बात इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. दीप्ति रंजन साहू ने कही। वे सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोल रहे थे।

संदर्भ के बिना अवलोकन कर सकता है भ्रमित

डॉ. साहू ने शोधार्थियों की भूमिका पर बल देते हुए स्पष्ट किया कि शोध केवल बाहरी अवलोकन पर आधारित नहीं होना चाहिए, बल्कि विषय के सामाजिक संदर्भ को समझना बेहद जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि किसी ग्रामीण महिला के अध्ययन में उसका ग्रामीण, स्त्री, निरक्षर, गरीब या दलित होना उस शोध को अधिक ठोस और वास्तविक बनाता है। संदर्भों के बिना किया गया अवलोकन शोधार्थी को भ्रमित कर सकता है। उन्होंने शोधार्थियों को अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया और बताया कि सुप्रीम कोर्ट व विधायिका भी समय-समय पर समाजशास्त्रीय अध्ययनों का उपयोग करते हैं, जो इस विषय की जिम्मेदारी को और बढ़ाता है।

पैट्रिक गेडिस और डॉ. मुखर्जी के विचारों की प्रासंगिकता

व्याख्यान में डॉ. साहू ने पैट्रिक गेडिस से लेकर डॉ. राधा कमल मुखर्जी तक के अध्ययनों की वर्तमान प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने 1930 के दशक में ही मनुष्य, पशु और पर्यावरण के बीच संतुलन रखने की बात कही थी। पर्यावरण संरक्षण में समाजशास्त्र की महत्ता बताते हुए उन्होंने पैट्रिक गेडिस के वाक्य- “यदि आप जीवित रहना चाहते हैं तो पत्तियों का ध्यान रखिए,” का भी स्मरण कराया।

जटिल सवालों के दिए सहज जवाब

डॉ. साहू ने विद्यार्थियों को समाजशास्त्र के श्रेष्ठ कार्यों, पुस्तकों और विशेषज्ञों से भी परिचित कराया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों के पेचीदा सवालों के सहजता से उत्तर दिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष एवं डीन डॉ. ज्योति उपाध्याय ने की। संचालन डॉ. मनु गोरहा ने किया तथा आभार डॉ. उत्तम सिंह मीणा ने माना। इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी प्रवीण चौहान, रोहित देवड़ा, सत्यम साहू और प्रथम बरबेले सहित कई विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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