वास्तु सलाहकार पारस जैन ‘आचार्य वराहमिहिर सम्मान’ से अलंकृत
विचार क्रांति साहित्य मंच ने मनाई जयंती, चार अन्य साहित्यकारों का भी हुआ सम्मान

उज्जैन। खगोलविद् आचार्य वराहमिहिर की जयंती चैत्र शुक्ल विजयादशमी के अवसर पर शहर के साहित्यकारों ने हर्षोल्लास के साथ उन्हें स्मरण किया। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के वाग्देवी भवन सभागृह में विचार क्रांति साहित्य मंच कायथा द्वारा जयंती एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
संस्था अध्यक्ष सुगनचंद जैन ने बताया कि समारोह कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा की अध्यक्षता, संस्कृत विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष तुलसीदास परोहा, प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी, चित्रकार श्रीकृष्ण जोशी और प्रोफेसर जगदीश शर्मा के आतिथ्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में आचार्य वराहमिहिर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर परिचर्चा की गई। इस दौरान कायथा निवासी वास्तु सलाहकार और ज्योतिर्विद पारस जैन को ‘आचार्य वराहमिहिर सम्मान 2026’ से अलंकृत किया गया। इसी क्रम में साहित्यकार दिलीप जैन को साहित्य महारथी सम्मान, सत्यनारायण नाटाणी सत्येंद्र को साहित्य सारथी सम्मान, अक्षय चवरे को साहित्य भारती सम्मान और नवोदित कलमकार तरुण उपाध्याय तरुण को साहित्य विद्यार्थी सम्मान प्रदान किया गया।
ज्ञान को विज्ञान से जोड़कर विश्व को किया प्रकाशमान
मुख्य अतिथि ने कहा कि वराहमिहिर स्वयं एक सक्षम साहित्यकार थे। उनकी जयंती पर साहित्यकारों का सम्मान उन्हें सच्ची पुष्पांजलि है। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर शैलेंद्र शर्मा ने कहा कि नवरत्नों में श्रेष्ठ रत्नशिरोमणि वराहमिहिर सिर्फ ज्योतिष के ज्ञानी ही नहीं थे, बल्कि वे विज्ञान की ऐसी प्रयोगशाला थे जिन्होंने अपने ज्ञान को धर्म और विज्ञान से जोड़कर ऐसे सिद्धांत प्रतिपादित किए, जिनकी रश्मियों से सम्पूर्ण विश्व प्रकाशमान हुआ है।
कविताओं के माध्यम से दी भावांजलि
कार्यक्रम में ज्योतिष विचार मंच के सचिव संजीव पांचाल भटुनी, अजमेर के ज्योतिषाचार्य राजेंद्र गुप्ता, आगर के ज्योतिर्विद राजेंद्र शर्मा और इंदौर के नंदकिशोर चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों के व्याख्यान के पश्चात साहित्यकारों ने काव्य पाठ किया। खुश्बू बाफना ने सरस्वती वंदना और आचार्य वराहमिहिर पर कविता का वाचन किया। डॉ. रमेशचंद्र चागेंसिया, रमेश मंदोरिया मयंक, नंदकिशोर पांचाल, संगीता तल्लैरा, शारदा श्री और अनिल पांचाल ने आचार्य की जन्मभूमि को रेखांकित करते हुए कविताएं पढ़ीं। वरिष्ठ कवि अशोक भाटी ने शिखर कलश कविता प्रस्तुत की।
बैंकर्स संस्था प्राची के डायरेक्टर व व्यंग्यकार शशांक दुबे और जीएल निगम ने सम्मानित साहित्यकारों को पुष्पमाला पहनाकर अपनी संस्था की ओर से सम्मान किया। मुकेश जोशी, सेवानिवृत्त शिक्षक मदनलाल राठौर, कृष्ण कान्त नागर, राजेश जैन और सेजमल कछवाय ने सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। संस्था प्रमुख सुगनचंद जैन ने काव्यमय प्रस्तुति के साथ आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन विचार क्रांति साहित्य मंच के संयोजक अनिल पांचाल सेवक ने किया।



