पाठशाला

निर्मला महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: ‘विकसित भारत @2047’ में शिक्षकों की भूमिका और शिक्षा के रूपांतरण पर मंथन शुरू

उद्घाटन सत्र में बोले वक्ता- विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और देश के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे अहम; NEP 2020 व भारतीय ज्ञान परंपरा पर होगी चर्चा

उज्जैन। निर्मला महाविद्यालय में ‘विकसित भारत @2047’ के संदर्भ में शिक्षक शिक्षा का दृष्टिकोण एवं रूपांतरण विषय पर 13 और 14 फरवरी को आयोजित होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन में देशभर के शिक्षाविदों और विद्वानों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (नेप) 2020 और भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में शिक्षकों की बदलती और महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार रखे।
मेजर डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने बताया कि उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता उज्जैन के मेट्रोपॉलिटन आर्चबिशप डॉ. सेबेस्टियन वडक्केल ने की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में एनसीटीई डब्ल्यूआरसी नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शैलेश झाला मौजूद रहे। वहीं, सारस्वत अतिथि के रूप में सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और विशिष्ट अतिथि के रूप में सरदार वल्लभभाई ग्लोबल यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद (गुजरात) के कुलगुरु प्रो. सुभाष ब्रह्मभट्ट ने शिरकत की।
इनके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. एच.एल. एनीजवाल, निर्मला महाविद्यालय समूह के निदेशक डॉ. एंटोनी जोसेफ निरप्पेल, प्रबंधक फादर जोस कडप्पारेल, प्राचार्या एवं अकादमिक निदेशक डॉ. कीर्ति डिड्डी और निर्मला शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. पंकजा सोनवलकर मंचासीन रहीं।
शिक्षकों के कंधों पर है देश के भविष्य की जिम्मेदारी
मुख्य वक्ता ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि शिक्षक न केवल विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण कर रहे हैं, बल्कि देश के विकास में भी अपनी महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। बदलते दौर में शिक्षकों की जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है।
इन अहम विषयों पर होगा तकनीकी सत्रों में मंथन
इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में शिक्षाविदों, विद्वानों और प्रतिभागियों द्वारा कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम, विविध स्तरों पर शिक्षक शिक्षा की गुणवत्ता व उसमें सुधार और विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ द्वारा विकसित दृष्टिकोण के महत्व जैसे समसामयिक विषयों पर विचार मंथन किया जाएगा।

Related Articles

Back to top button