धर्म-कर्म

शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर में चैत्र नवरात्रि महोत्सव का शंखनाद, रजत मुकुट धारण कर विराजीं भगवती

पंचामृत अभिषेक और घट स्थापना के साथ शुरू हुआ नौ दिवसीय अनुष्ठान, पहले दिन ही 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

उज्जैन। चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष के प्रथम दिन 51 शक्तिपीठों में से एक माता हरसिद्धि के दरबार में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के श्रीसूक्त के मंत्रोच्चार के साथ माता का पंचामृत अभिषेक किया गया और उन्हें विशेष रजत मुकुट धारण कराया गया। घट स्थापना और महाआरती के साथ ही नौ दिवसीय शक्ति महापर्व का विधिवत शुभारंभ हो गया।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
नवरात्रि के पहले दिन दर्शनार्थियों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सहायक प्रशासक इंद्रेश लोधी ने बताया कि श्रद्धालुओं को धूप और गर्मी से बचाने के लिए मंदिर परिसर में छांव, कारपेट और पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई है। मंदिर समिति के अनुसार पहले दिन ही 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओ ने माता के दर्शन का लाभ प्राप्त किया।
नौ दिनों तक होंगे विशेष अनुष्ठान और चंडी पाठ
मंदिर के पुजारी राजू गोस्वामी ने बताया कि नौ दिनों तक भगवती का नित्य रजत स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में चंडी पाठ भी निरंतर शुरू हो गया है। महाष्टमी और नवमी के संधिकाल में विशेष महापूजा की जाएगी। नवमी के दिन हवन की पूर्णाहुति और रात्रि में जवारे विसर्जन के साथ नवरात्रि महापर्व का समापन होगा।
सम्राट विक्रमादित्य की कुलदेवी हैं माता हरसिद्धि
माता हरसिद्धि का यह दरबार देश के 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती की कोहनी गिरी थी। यह चक्रवर्ती सम्राट राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी का स्थान भी है। सम्राट विक्रमादित्य माता के अनन्य भक्त थे और उन्होंने 11 बार अपना मस्तक काटकर भगवती के चरणों में अर्पित किया था। इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के चलते देश-दुनिया के सभी राज्यों से श्रद्धालु यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

 

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