’प्राच्य प्रकर्ष’ में विद्यार्थियों ने किया ग्रहशांति विधान का अनुष्ठान
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में हुआ तीन दिवसीय वार्षिक स्नेह सम्मेलन, राघवेंद्र तिवारी बने सर्वोत्कृष्ट विद्यार्थी

कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र बोले- वैदिक कर्मकांड के विज्ञान को जन-जन तक पहुंचाना जरूरी; कर्मकांड के छात्रों ने किया ग्रहशांति विधान
उज्जैन। शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में तीन दिवसीय वार्षिक स्नेह सम्मेलन ’प्राच्य प्रकर्ष’ का बुधवार को भव्य समापन हुआ। समारोह में कर्मकांड डिप्लोमा के विद्यार्थियों ने ग्रहशांति विधान का अनुष्ठान संपन्न किया। मुख्य अतिथि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. शिवशंकर मिश्र ने कहा कि संस्कृत ज्ञान-विज्ञान की भाषा है। उन्होंने वैदिक कर्मकांड के वैज्ञानिक पक्ष को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही वर्तमान समय में यज्ञ की उपयोगिता और उसके पर्यावरणीय महत्व पर भी विचार रखे।
कुलगुरु ने स्नेह सम्मेलन के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इसमें छात्र राघवेंद्र तिवारी को सर्वोत्कृष्ट विद्यार्थी का पुरस्कार प्रदान किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में महर्षि पाणिनि विश्वविद्यालय के डॉ. उपेंद्र भार्गव, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र और डॉ. संकल्प मिश्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेमंत शर्मा ने किया और आभार डॉ. यश शर्मा ने माना। इस अवसर पर महाविद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं समस्त स्टॉफ मौजूद रहा। यह जानकारी डॉ. ममता मालिक और डॉ. श्रेयस कोरान्ने ने संयुक्त रूप से दी।



