पाठशाला

संस्कृत विद्या के संवर्धन पर मंथन: कलेक्टर की अध्यक्षता में जनभागीदारी समिति की बैठक, नैक मूल्यांकन और विकास कार्यों को मिली हरी झंडी

शासकीय संस्कृत महाविद्यालय के ग्रंथालय का होगा उन्नयन, विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए रखे गए सभी प्रस्तावों पर लगी मुहर

उज्जैन। शासकीय संस्कृत महाविद्यालय में संस्कृत विद्या के संवर्धन और विद्यार्थियों की सुविधाओं के विस्तार को लेकर गुरुवार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सम्राट विक्रमादित्य प्रशासनिक संकुल में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में महाविद्यालयीन जनभागीदारी समिति की अहम बैठक संपन्न हुई। इसमें महाविद्यालय के विकास कार्यों, ग्रंथालय (लाइब्रेरी) के उन्नयन और आगामी नैक (NAAC) मूल्यांकन प्रक्रिया सहित कई अहम प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा कर उन्हें स्वीकृति प्रदान की गई।
प्राचार्य ने पेश किया शैक्षणिक गतिविधियों का रिपोर्ट कार्ड
बैठक की शुरुआत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा शर्मा ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने समिति को विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए आयोजित किए गए विशेष व्याख्यान, कार्यशालाओं, शैक्षणिक भ्रमण और राष्ट्रीय वेबिनार जैसे विविध कार्यक्रमों की जानकारी दी।
नैक मूल्यांकन और विकास कार्यों का खाका तैयार
समिति के समक्ष विद्यार्थियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित विकास कार्यों की रूपरेखा रखी गई। साथ ही, महाविद्यालय के ग्रंथालय को अपग्रेड करने और नैक मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया में होने वाले व्यय का सटीक आकलन भी प्रस्तुत किया गया। सभी प्रस्तावों पर गहन मंथन के बाद समिति ने नियमानुसार उन्हें अपनी सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है।
इनकी रही विशेष उपस्थिति इस महत्वपूर्ण बैठक में महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के समन्वयक डॉ. श्रेयस कोरान्ने और साहित्य विभाग के आचार्य डॉ. हेमंत शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में लिए गए निर्णयों और कार्यवाहियों की जानकारी जनभागीदारी समिति के प्रभारी एवं ज्योतिष विभाग के आचार्य यश शर्मा ने दी।

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