समर्थ गुरु रामदास नवमी पर निकली भव्य पालकी यात्रा, भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
पानदरीबा स्थित गणपति मंदिर में हुआ आयोजन, छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु का किया पुण्य स्मरण

उज्जैन। शहर के पानदरीबा स्थित श्री गणपति मंदिर में बुधवार को समर्थ गुरु रामदास नवमी का पर्व हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री समर्थ सेवा मंडल, पानदरीबा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु समर्थ रामदास स्वामी का पुण्य स्मरण किया गया।
संस्था प्रमुख दिनकर तेलंग ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ कृष्ण नवमी के अवसर पर बुधवार सुबह 9ः30 बजे मंदिर प्रांगण से समर्थ रामदास स्वामी की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। पालकी में स्वामी जी की प्रतिमा और पादुकाओं के पूजन के बाद नगर भ्रमण कराया गया। इस अवसर पर पंकज चांदोरकर, रविंद्र मूले, मिलिंद पन्हालकर, निलेश फड़नीस, श्री पागे (जम्बो दादा), अजय विपट, श्री कोरान्ने, श्री काले, राजश्री जोशी, राजेंद्र जोशी सहित बड़ी संख्या में समाजजन और भक्त शामिल हुए।
मिलिंद पन्हालकर एवं निलेश फड़नीस ने बताया कि उत्सव के अंतर्गत शाम 7 बजे से रात्रि 9ः30 बजे तक विशाल भंडारे (महाप्रसादी) का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन में श्री समर्थ सेवा मंडल के सदस्यों सहित क्षेत्रीय रहवासियों का विशेष सहयोग रहा।
युवाओं को दिया था बल और राष्ट्रभक्ति का संदेश
कार्यक्रम के दौरान समर्थ गुरु रामदास के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को स्वराज्य और धर्म रक्षा की प्रेरणा दी थी। स्वामी जी का मानना था कि स्वस्थ शरीर से ही राष्ट्र की उन्नति संभव है, इसलिए उन्होंने युवाओं को व्यायाम और हनुमान जी की उपासना का संदेश दिया। उन्होंने ’दासबोध’ और ’मनाचे श्लोक’ जैसे ग्रंथों की रचना कर समाज को नई दिशा दी थी। माघ कृष्ण नवमी को ही उन्होंने सज्जनगढ़ (महाराष्ट्र) में समाधि ली थी, जिसे ’दास नवमी’ के रूप में मनाया जाता है।



