सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व गौरैया दिवस: प्राध्यापकों और छात्रों ने ली पक्षी संरक्षण की शपथ
बढ़ते शहरीकरण ने छीना गौरैया का आशियाना, पक्षियों के लिए बांटे गए सकोरे और कृत्रिम घोंसले

उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आज ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पक्षियों के लिए मिट्टी के सकोरे (पानी के पात्र) और कृत्रिम घोंसले वितरित किए गए, ताकि गर्मी के मौसम में उन्हें आसानी से दाना-पानी मिल सके।
आधुनिकता के साथ जैव-विविधता सहेजना भी जरूरी
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज ने अपने संबोधन में पर्यावरण और पक्षियों के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौरैया हमारे घरेलू जीवन का अहम हिस्सा रही है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण ने इनसे इनका आशियाना छीन लिया है। हमें न केवल आधुनिक बनना है, बल्कि अपनी जैव-विविधता को भी सहेजना है।
रेडिएशन और कीटनाशकों के कारण संकट में गौरैया
कुलानुशासक प्रोफेसर शैलेंद्र कुमार शर्मा ने गौरैया के सांस्कृतिक और पारिस्थितिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि लोक गीतों और कहानियों की यह ‘गौरैया’ आज संकट में है। मोबाइल विकिरण और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग ने इनकी संख्या को काफी कम कर दिया है। उन्होंने प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता लौटाने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी को अपने घर में कम से कम एक सकोरा और दाना-पानी का पात्र अवश्य रखना चाहिए। इस अवसर पर उपस्थित समस्त प्राध्यापकों और छात्रों ने पक्षी संरक्षण की शपथ ली।



