सहकारी संस्थाओं की मजबूती के लिए 40 प्रतिशत राशि फिक्स डिपॉज़िट रखें : उपायुक्त के. पाटनकर
उज्जैन में नागरिक एवं साख सहकारी संस्थाओं का दो दिवसीय कौशल उन्नयन व नेतृत्व विकास प्रशिक्षण शुरू

उज्जैन। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित भोपाल और ज़िला सहकारी संघ मर्यादित उज्जैन के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कौशल उन्नयन एवं नेतृत्व विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में उज्जैन ज़िले की नागरिक सहकारी बैंक और साख सहकारी संस्थाओं के अध्यक्ष, संचालक, प्रबंधक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथियों का विधिवत स्वागत सहायक आयुक्त एवं संघ के प्रशासक संजय कौशल ने किया।
संस्था के हित के लिए रोज़ 10 मिनट चिंतन करें
संघ के प्रभारी प्रबंधक सुमेरसिंह सोलंकी ने अपने स्वागत भाषण में सहकारिता का अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार मनुष्य के शरीर के अंग एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं, वही सहकारिता है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि जिस तरह संस्था प्रमुख भगवान के ध्यान में प्रतिदिन 10 मिनट बैठते हैं, उसी तरह उन्हें रोज़ 10 मिनट अपनी संस्था के हित, उन्नति और विकास के बारे में भी सोचना चाहिए, ताकि सदस्यों को योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ मिल सके।
आर्थिक स्थिति मजबूत रखने का दिया मंत्र
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सहकारिता उपायुक्त के. पाटनकर ने वित्तीय प्रबंधन पर मार्गदर्शन देते हुए कहा कि संस्थाओं को अपनी जमा पूंजी में से अधिकतम 60 प्रतिशत तक ही ऋण वितरण करना चाहिए, जबकि 40 प्रतिशत राशि फिक्स डिपॉज़िट में रखनी चाहिए। इससे किसी भी विपरीत आर्थिक परिस्थिति में संस्था मजबूत स्थिति में बनी रहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थाओं को अपने बचत खाते और एफडी ज़िला सहकारी केन्द्रीय बैंक या अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक में ही रखनी चाहिए। इससे सहकारिता के माध्यम से परोपकार के कार्य होंगे और सदस्यों का विश्वास अर्जित किया जा सकेगा।
प्रशिक्षण, पारदर्शिता और तकनीक पर ज़ोर
समारोह में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। म.प्र. राज्य सहकारी संघ मर्यादित (इंदौर) के सहकारी प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य दिलीप एरमट ने कहा कि प्रशिक्षण से हमें नए तरीक़े से कार्य करने का अवसर मिलता है, जिससे संस्थाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आती है। ऑडिट ऑफिसर संजीव शर्मा ने कर्तव्यों और संचालन की जानकारी देते हुए कहा कि अन्य प्रदेशों की सफल संस्थाओं के अध्ययन भ्रमण से उनकी कार्यप्रणाली का ज्ञान प्राप्त कर अपनी संस्थाओं को सुदृढ़ बनाया जा सकता है। सीए अनुभव प्रधान ने कंप्यूटरीकृत व्यवस्था, आयकर और जीएसटी के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था के कंप्यूटरीकृत होने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ती है, जिससे संस्था अपना कार्यक्षेत्र आसानी से बढ़ा सकती है।



