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साधारण मिट्टी को कला से बनाया असाधारण: ललित कला अकादमी दिल्ली में डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया की चित्र प्रदर्शनी का समापन

कालिदास संस्कृत अकादमी की उपनिदेशक ने पिता की स्मृति में आयोजित की थी एकल प्रदर्शनी

 व्हाइट क्ले और कैनवास के बेहतरीन तकनीकी प्रयोग से सजे चित्रों को वरिष्ठ मूर्तिकार सुरेश कुमार ने सराहा

उज्जैन। कालिदास संस्कृत अकादमी की उपनिदेशक डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया द्वारा अपने पिता भूरेलाल फिरोजिया की स्मृति में आयोजित एकल चित्रकला प्रदर्शनी का नई दिल्ली स्थित ललित कला अकादमी में समापन हो गया। यह प्रदर्शनी 21 से 27 फरवरी तक आयोजित की गई थी।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के क्षेत्रीय संयोजक (प्रचार-प्रसार) डॉ. जफर महमूद ने बताया कि समापन कार्यक्रम वरिष्ठ मूर्तिकार सुरेश कुमार के मुख्य आतिथ्य और माता जावित्री फिरोजिया की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर विशिष्ट कलाकार इंदु त्रिपाठी, मधुसूदन, हेम-ज्योतिका और शुचि कालरा की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत में जावित्री फिरोजिया ने शॉल, श्रीफल और पुष्पमाला से सभी अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य अतिथि सुरेश कुमार ने डॉ. फिरोजिया के चित्रों की सराहना करते हुए कहा कि ये कलाकृतियां व्हाइट क्ले और कैनवास का एक बेहतरीन तकनीकी प्रयोग हैं। क्ले के उभरे हुए पैटर्न और गोल्ड का संतुलन इसे एक अद्भुत स्वरूप देता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चौखानों को एक बड़े ‘वी’ (V) आकार में जोड़ना कलाकार की गहरी सोच और सुंदर संयोजन को दर्शाता है। यह सरल, सहज स्वरूप और शिल्प कौशल का अद्भुत मिलन है।
डॉ. फिरोजिया की कला शैली तकनीकी अमूर्त चित्र शैली है। ये केवल पेंटिंग नहीं हैं जिन्हें सिर्फ देखा जाए, बल्कि यह मूर्तिकला का वह त्रिविमीय (3D) रूप है जिसे छूकर महसूस किया जा सकता है। व्हाइट क्ले पर सुनहरे रंग का प्रयोग एक आध्यात्मिक प्रभाव प्रस्तुत करता है, जो यह दर्शाता है कि कैसे साधारण मिट्टी को कला के माध्यम से असाधारण बनाया जा सकता है। समापन कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन डॉ. रवि कुमार ने दिया तथा आभार डॉ. योगेश्वरी फिरोजिया ने माना।

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