सिंहस्थ क्षेत्र में आयुर्वेदिक कॉलेज छात्रावास निर्माण पर विवाद: प्राचीन हनुमान मंदिर हटाने की तैयारी से श्रद्धालुओं में आक्रोश
प्रशासन के फैसले का स्थानीय लोगों ने किया कड़ा विरोध, मंदिर को बताया आस्था का केंद्र और 'नगर रक्षक'

उज्जैन: सिंहस्थ क्षेत्र की पावन भूमि पर आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्रों के लिए प्रस्तावित छात्रावास निर्माण की योजना अब विवादों के घेरे में आ गई है। प्रशासन द्वारा निर्माण कार्य को गति देने के उद्देश्य से क्षेत्र में स्थित सर्व सुखदाता बाल विजय हनुमान मंदिर को हटाने की तैयारी की जा रही है, जिसका स्थानीय श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।
आस्था और परंपरा का केंद्र है मंदिर
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह मंदिर कोई सामान्य ढांचा नहीं, बल्कि अनादिकाल से भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। प्रतिदिन यहाँ सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन, पूजन और अर्चन के लिए पहुँचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, भगवान बाल विजय हनुमान की प्रतिमा अत्यंत चमत्कारी है और वे नगर के खेड़ा क्षेत्र (परकोटे) में ‘नगर रक्षक’ के रूप में विराजमान हैं।
प्रशासनिक निर्णय पर उठे सवाल
श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर गहरी नाराज़गी है कि विकास और निर्माण के नाम पर एक प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि मंदिर अनादिकाल से यहाँ स्थित है और क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। उनका मानना है कि छात्रावास निर्माण के लिए मंदिर को हटाना धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था और परंपराओं का मुख्य केंद्र है।
फिलहाल, मंदिर को लेकर उपजे इस तनाव ने प्रशासनिक अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्रवासी इस मांग पर अड़े हैं कि छात्रावास का निर्माण, मंदिर की गरिमा और अस्तित्व को प्रभावित किए बिना किया जाना चाहिए।


