2/2 टूरिस्ट तीर्थ यात्रा स्लीपर बसों पर आरटीओ द्वारा पाबंदी का पुरजोर विरोध
प्रदेशभर के बस ऑपरेटर, ट्रेवल व्यवसायी, धार्मिक यात्रा आयोजक, परिवहन क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग उज्जैन में एकत्रित हुए

तत्काल इस पाबंदी पर पुनर्विचार करने की मांग
बाहर प्रदेश में यात्रा कर रही बसों को वापस आने हेतु विशेष अनुमति देने की मांग की
उठी मांग, 2/2 स्लीपर बसों को आरकेआई श्रेणी के अंतर्गत एआईएस-119 मानक में जोड़ा जाए
उज्जैन। मध्य प्रदेश में संचालित 2/2 टूरिस्ट तीर्थ यात्रा स्लीपर बसों पर क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) द्वारा लगाई गई पाबंदी के विरोध में प्रदेशभर के बस ऑपरेटर, ट्रेवल व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधि, धार्मिक यात्रा आयोजक तथा परिवहन क्षेत्र से जुड़े अनेक लोग उज्जैन में एकत्रित हुए।
उज्जैन के मनोरमा गार्डन में हुई बैठक में उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि ये बसें विधिवत रूप से पंजीकृत हैं, सभी आवश्यक कर, परमिट एवं नियमों का पालन करती हैं, और वर्षों से तीर्थ यात्राओं, धार्मिक कार्यक्रमों, विवाह समारोहों एवं लंबी दूरी की सुरक्षित यात्रा के लिए उपयोग में लाई जाती रही हैं। अचानक की गई इस कार्रवाई से हजारों लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ा है और परिवहन व्यवसाय गंभीर संकट में आ गया है।
संघ के सचिव अनिल भावसार ने कहा कि मध्य प्रदेश की कई तीर्थ यात्री बसें वर्तमान में अन्य राज्यों में संचालित हैं, जिनकी यात्राएँ 40 से 50 दिनों की लंबी अवधि की हैं और वे पहले ही यात्रा पर जा चुकी हैं। ऐसी बसों को तत्काल प्रभाव से अनलॉक कर सुरक्षित रूप से वापस आने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि यात्रियों और बस संचालकों को बीच रास्ते में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
एसोसिएशन द्वारा यह भी सवाल उठाया गया कि यदि आरटीओ के अनुसार 2/2 स्लीपर बसें निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, तो यह परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है कि अब तक इन्हीं बसों को किस आधार पर पंजीकरण, परमिट और फिटनेस स्वीकृति दी जाती रही। वर्षों से चल रही बसों पर अचानक आपत्ति जताना न केवल असंगत है बल्कि इससे प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी संदेह उत्पन्न होता है।
प्रतिनिधियों ने कहा कि बिना पूर्व वैकल्पिक व्यवस्था और स्पष्ट दिशा-निर्देश के इस प्रकार की पाबंदी लगाना न्यायसंगत नहीं है। इससे आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, विशेषकर तीर्थ यात्राओं पर जाने वाले बुजुर्ग यात्रियों को।
बैठक में निर्णय लिया कि शासन एवं परिवहन विभाग से तत्काल इस पाबंदी पर पुनर्विचार करने की मांग की जाएगी। बाहर प्रदेश में यात्रा कर रही बसों को वापस आने हेतु विशेष अनुमति देने की मांग की गई। एक प्रतिनिधिमंडल संबंधित अधिकारियों से मिलकर इस विषय पर विस्तृत चर्चा करेगा।
बैठक में प्रमुख मांग रखी गई कि 2/2 स्लीपर बसों को आरकेआई श्रेणी के अंतर्गत एआईएस-119 मानक में जोड़ा जाए, ताकि इन बसों का संचालन विधिक रूप से स्पष्ट श्रेणी में किया जा सके। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। सभी बस संचालक एकजुट रहकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात शासन तक पहुंचाएंगे। बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य नियमों का पालन करते हुए परिवहन सेवा जारी रखना है, और वे शासन से सकारात्मक समाधान की अपेक्षा रखते हैं।



