माधव महाविद्यालय में मना ’मराठी राजभाषा गौरव दिन, कुसुमाग्रज व डॉ. अपर्णा जोशी को दी गई श्रद्धांजलि
मातृभाषा में संवाद कर बढ़ाएं भाषाओं का मान, ’कणा’ कविता का हुआ पाठ

उज्जैन। प्रधानमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय माधव महाविद्यालय के मराठी विभाग में ’मराठी राजभाषा गौरव दिन’ मनाया गया। इस अवसर पर विपुल साहित्य रचने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार वि. वा. शिरवाडकर (कुसुमाग्रज) और मराठी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्षा स्व. डॉ. अपर्णा जोशी की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभाग के पूर्व छात्र-छात्राओं ने कुसुमाग्रज की कविताओं का पाठ कर उन्हें आदरांजलि दी तथा डॉ. अपर्णा जोशी से जुड़े संस्मरण सुनाकर व कविताओं का वाचन कर उन्हें भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मराठी शब्दों में है अनोखी ताकत
मुख्य वक्ता के रूप में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, अटल बिहारी वाजपेयी महाविद्यालय (इंदौर) के मराठी विभाग के प्राध्यापक डॉ. ज्ञानेश्वर तिखे उपस्थित थे। उन्होंने कुसुमाग्रज की सुप्रसिद्ध मराठी कविता “कणा“ (रीढ़ की हड्डी) का भावार्थ स्पष्ट करते हुए मराठी भाषा के शब्दों की ताकत के बारे में बताया। उन्होंने गुलजार द्वारा किए गए इस कविता के हिंदी अनुवाद का भी पाठ किया।
जीवन के हर पहलू को प्रकट करता है कुसुमाग्रज का साहित्य
शासकीय संस्कृत महाविद्यालय (इंदौर) की पूर्व विभागाध्यक्षा डॉ. लीला मोरे ने कहा कि सभी भाषाएं सम्माननीय हैं। उन्होंने मराठी भाषा को अत्यंत मधुर और अमृततुल्य बताते हुए संत ज्ञानेश्वर के प्रसिद्ध उद्धरण का विश्लेषण भी किया। उन्होंने कहा कि कवि कुसुमाग्रज का समृद्ध साहित्य जीवन के हर पहलू को प्रकट करता है। मराठी के शब्द एवं साहित्य अनमोल हैं। इसकी गरिमा को जीवित रखने के लिए सभी को अपनी मातृभाषा में बोलने पर विचार करना चाहिए और भाषाओं का मान बढ़ाना चाहिए।
कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. कल्पना वीरेंद्र सिंह, चित्रकला विभागाध्यक्ष डॉ. अल्पना उपाध्याय, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. ज़फ़र महमूद और दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. शोभा मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित थीं। सुचित्रा पंडित, रवींद्र अयाचित, दिनेश क्षीरसागर, डॉ. महेंद्र गोरे, डॉ. नेत्रा रावणकर और राधेश्याम भील ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजश्री राजेंद्र जोशी ने किया। अतिथियों का परिचय व स्वागत डॉ. शैलजा साबले ने दिया तथा अंत में आभार मोहन सिंह मुजाल्दा ने माना।



