डॉ. दीपिका रायकवार को बांछड़ा समुदाय की विलुप्तप्राय भाषा संरक्षण हेतु राजकीय सम्मान
उज्जैन की बेटी बनी प्रदेश और लोकसंस्कृति का गौरव

उज्जैन। घुमन्तू समुदायों की विलुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय, नवाचारी एवं शोधपरक कार्य के लिए उज्जैन की बेटी डॉ. दीपिका रायकवार को राजकीय स्तर पर प्रशंसा-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह गौरवपूर्ण सम्मान 26 जनवरी को भोपाल में आयोजित राजकीय समारोह के दौरान राज्यपाल मंगुभाई पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के करकमलों से प्रदान किया गया।
यह उपलब्धि न केवल डॉ. दीपिका रायकवार की व्यक्तिगत साधना और समर्पण का परिचायक है, बल्कि उज्जैन नगरी के लिए गर्व का विषय भी है। लोकसंस्कृति, भाषा और ज्ञान-परंपरा की भूमि उज्जैन की यह बेटी आज प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में विलुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है।
यह प्रशंसा-पत्र जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद (संस्कृति विभाग, मध्यप्रदेश शासन) द्वारा घुमन्तू समुदाय ‘बांछड़ा’ की विलुप्तप्राय भाषा के संरक्षण हेतु विकसित “टॉकिंग डिक्शनरी” के निर्माण में किए गए नवाचारी प्रयोग के लिए प्रदान किया गया। इस परियोजना के माध्यम से भाषा के शब्दों के साथ-साथ उनके उच्चारण, सांस्कृतिक संदर्भ और मौखिक परंपरा को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया गया है, जो भाषा संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि मानी जा रही है।
समारोह के दौरान यह उल्लेख किया गया कि इस प्रकार के शोध और तकनीकी नवाचार जनजातीय एवं घुमन्तू समुदायों की भाषाई-सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर डॉ. दीपिका रायकवार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा “भाषा किसी भी समुदाय की सांस्कृतिक आत्मा और पहचान होती है। बांछड़ा समुदाय की विलुप्तप्राय भाषा को संरक्षित करने का यह प्रयास उनकी परंपरा और अस्मिता को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक विनम्र किंतु सार्थक पहल है।”
उन्होंने इस सम्मान के लिए राज्यपाल, मुख्यमंत्री, संस्कृति विभाग एवं जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी लोक, जनजातीय एवं घुमन्तू समुदायों की भाषाओं के संरक्षण हेतु ऐसे प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहेगा।
उल्लेखनीय है कि उज्जैन की इस बेटी की यह उपलब्धि सम्पूर्ण उज्जैन अंचल के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि स्थानीय जड़ों से जुड़ा शोध वैश्विक महत्व भी प्राप्त कर सकता है।



