धर्म-कर्म

सनातन संस्कृति में विश्व का मार्गदर्शन करने की ताकत – महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरीजी

श्रीभस्मरमैया भक्त मण्डल का वार्षिक स्नेह सम्मेलन सम्पन्न 

उज्जैन। सनातन संस्कृति में विश्व का मार्गदर्शन करने की ताकत है। सनातन संस्कृति स्नेह, आदर प्रेम, सद्भावना को समाहित रखती है। लेकिन वक्त आने पर यही संस्कृति ढाल, तलवार, बरछी, भाला और तोप में परिणित हो जाती है।
उक्त विचार भस्म रमैया भक्त मंडल द्वारा आयोजित सम्मान समारोह अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरी महाराज ने व्यक्त किये। स्वामीजी ने कहा कि कितना भी बड़ा खिलाड़ी हो छल का अंत मात ही होता है …एक समय के बाद सुंदरता नहीं बल्कि मर्यादा और संस्कार आकर्षित करते हैं …जब धर्म में राजनीति आती है तब रामायण निर्मित होती है और जब राजनीति में धर्म आता है तो महाभारत की रचना होती है ..। हम मंदिर में जाकर उन मूर्तियों को पूजते हैं जो हमने खुद बनवाई है… घर में उन जीवित मूर्तियां माता-पिता का भी जरूर आदर करें जिन्होंने हमें बनाया है…। शमशान शिखर एवं शासन पर इंसान हमेशा अकेला ही होता है, सबको साथ लेकर चलिए मगर कभी अकेला भी चलना पड़े तो डरिए मत ..जो आपको चैलेंज करते हैं वही आपको चेंज करते हैं । शाब्दिक अभिषेक भस्म रमिया भक्त मंडल के संस्थापक  प्रवीण मादुसकर ने किया। सूत्रधार स्वामी मुस्कराके, शैलेंद्र व्यास थे। इस अवसर पर कला गुरु अनिकेत सेन, वरिष्ठ पत्रकार राजेश वर्मा, प्रमोद व्यास, मन सोलंकी बड़नगर, शुभम कुमावत इंगोरिया, उदित श्रृंगी, शानू शर्मा राजस्थान, दीपक गुप्ता दिल्ली, आदित्य सीहोर, आशीष कुशवाहा सागर, राजवीर कुशवाह उज्जैन, राहुल चौहान महू, प्रकाश तलेजा बड़नगर का विशिष्ट अभिनंदन शाल श्रीफल स्मृति चिन्ह द्वारा किया गया। आभार प्रदर्शन सागर गुप्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर भक्त मंडल द्वारा झांझ, खड़ताल, ढोल की मनमोहक धुन बजाकर भस्म रमैया का पूजन अर्चन एवं आरती समर्पित की गई। समारोह में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र सहित मध्यप्रदेश में संचालित विभिन्न मण्डल शाखाओं के सदस्य उपस्थित रहे।

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