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राष्ट्रीय सेवा योजना विद्यार्थियों के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है : आचार्य शैलेंद्र पाराशर

राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के दत्तक ग्राम सोडंग में बौद्धिक सत्र्

उज्जैन। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस शासकीय माधव महाविद्यालय, उज्जैन की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के दत्तक ग्राम सोडंग में आयोजित शिविर के बौद्धिक सत्र् में समाजशास्त्री, साहित्यकार एवं चिंतक आचार्य शैलेंद्र पाराशर ने संबोधित करते हुए कहा कि मेहनत, समर्पण, समाजसेवा, परिश्रम, संवेदनशीलता एवं सतत् प्रयास से खुली आंँखों के सपने साकार होते हैं।
देश की सबसे बड़ी शक्ति युवा हैं। हमारी जैसी दृष्टि् होती है, वैसी सृष्टि दिखाई देती है। राष्ट्रीय सेवा योजना का सूक्ति वाक्य “मैं “नहीं “हम“ के भाव को विकसित करना सिखाता है। यही भाव उसे देश प्रेम एवं समाज सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। आप प्रति माह मन में तीस सत्व गुणों को धारण करने का संकल्प लेकर अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व में सात्विक परिवर्तन लाने का प्रयत्न कीजिए। मन को नकारात्मकता, निराशा एवं अवसाद के भावों से नहीं जोड़ने दे, इसके प्रति सचेत रहें। प्रतिदिन मन को सकारात्मकतक भाव एवं विचार से जोड़नें पर होने वाले परिवर्तन स्वयं महसूस करेंगे। मनुष्य का मन संकल्पों को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सदैव मन को सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत रखने की निरंतर साधना करने से व्यक्तित्व एवं कृतित्व में स्वतः असाधारण परिवर्तन होता है। शिविर प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नीरज सारवान ने स्वागत भाषण एवं अतिथि परिचय दिया। इस अवसर पर डॉ. शैलजा साबले, प्रो. राधेश्याम भील प्रो. लाखन सिंह कुशवाह, डॉ. नीता तोमर, प्रो.मोहन मुजाल्दा, डॉ. संदीप लांडे, संजय बघेल, करोड़ीसिंह एवं एन एन एस के स्वयंसेवक उपस्थित थे।

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