धर्म-कर्म

अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ में त्रिशिखरीय जिनालय का सप्तम वर्षगांठ ध्वजारोहण

बेंगलुरु के प्रवासी कुशलराज गुलेच्छा परिवार ने फहराई धर्म ध्वजा

उज्जैन। मारवाड़ के प्रवासीयों का दक्षिण भारत में व्यापार सहित धार्मिक कार्य में भी जबरदस्त योगदान है। बैंगलुरु के प्रवासी कुशलराज गुलेच्छा परिवार इसी परंपरा में हमेशा अग्रणी है। अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ के त्रिशिखरीय जिनालय के सातवें ध्वजारोहण आयोजन में भी गुलेच्छा परिवार की धार्मिक भावना के प्रदर्शन की सभी ने जबरदस्त सराहना की।
अवंती पार्श्वनाथ तीर्थ जैन श्वेतांबर मारवाड़ी समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में अवंती तीर्थ की सातवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में तीर्थ के शिखर पर ध्वजारोहण का वरघोडा निकाला गया। सत्यनारायण मन्दिर से प्रारंभ हुए वरघोड़े में परम पूज्य गुरुदेव श्री ललितप्रभ सागर जी, श्री चन्द्रप्रभ सागर जी म. सा. आदि ठाणा के साथ में उज्जैन जैन समाज संघ के साथ धूमधाम से निकले वरघोड़े में परमात्मा की पालकी, रथ, बैंड, ढोल बाजे के साथ सत्यनारायण मन्दिर से आरंभ होकर तीर्थ परमात्मा के आंगन में शांतिनाथ महिला मंडल, बालिका मंडल, जिनेश्वर युवा परिषद्, शांति सुलोचन बहू मंडल के साथ में पहुंचा जहां ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक कुमार कोठारी ने सभी का स्वागत किया। तत्पश्चात मूलनायक अवंति पार्श्वनाथ की मुख्य ध्वजा बैंगलोर निवासी संघवी कुशलराज उत्तमचन्द ललित कुमार गुलेच्छा परिवार ने कायमी अमर ध्वजा फहराई। चिंतामणी पार्श्वनाथ ध्वजा के लाभार्थी श्रीमती विजया हीरालालजी राठौड बड़गाँव निवासी, आदेश्वर भगवान की ध्वजा के लाभार्थी श्रीमती विमलादेवी माँगीलालजी मालू परिवार सूरत निवासी ने फहराई। इस उपलक्ष्य में गुरुदेव ने अपने प्रवचन में कहा कि आज से सात वर्ष पूर्व का आज वही माघ चतुर्दशी का दिन आया है जब प्रतिष्ठाचार्य खरतर गच्छाधिपति आचार्य भगवन्त श्री जिन मणिप्रभ सूरीश्वर जी महाराजा एवं शताधिक साधु साध्वी जी भगवन्तों की निश्रा में प्रतिष्ठा समय का जो माहौल तीर्थ नगरी में था वह पूरे भारत में अभी भी लोगों की नजरों के सामने प्रतिष्ठित है। इसके लिए समाज जन ट्रस्टी एवं प्रतिष्ठा कार्यक्रम के संयोजक संघवी कुशल राज गुलेच्छा बेंगलुरु निवासी बधाई के पात्र हैं। जीवन यात्रा में प्रतिकूलता का मूल्य जाने बिना अनुकूलता के अनुभव का पता नहीं चलता है। मूलनायक अवंती तीर्थ की ध्वजा आज बदली जा रही है, इसी तरह व्यक्ति को अपने व्यवहार एवं दिनचर्या को भी हृदय से बदलना चाहिए। ध्वजा तो प्रतीकात्मक होती है। गुरुदेव श्री का कहना है कि जब भी ध्वजा बदली जाती है तो उस समय मनुष्य को भी अपने भावों में परिवर्तन करके परमात्मा शक्ति को याद करके श्रद्धा के साथ नमन करना चाहिए तथा अपने जीवन की बुराइयों का त्याग करना चाहिए ताकि ध्वजा बदलने की सार्थकता होती है। संघ के ललित डाकलिया ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर पूरा समाज हजारों की संख्या में जुलूस में उपस्थित रहा। विधि कारक पंकज चौपड़ा, खाचरौद वालों ने विधिविधान करवाया। ध्वजारोहण कार्यक्रम में अध्यक्ष अशोक कोठारी, उपाध्यक्ष ललित बाफना, महामंत्री अभय छाजेड़, कोषाध्यक्ष दिलीप चौपड़ा, ट्रस्टी रमेश बाठिया, रजत मेहता, जिनेन्द्र चौपड़ा, चन्द्रप्रकाश संकलेचा, भैरुलाल छाजेड़ के साथ उज्जैन के सभी संघों के सदस्य और हजारों की संख्या में जनसमूह में उपस्थित थे।

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