धर्म-कर्म
चेन्नई में उज्जैन के भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो का सम्मान
बौद्ध धम्म प्रचार के 70 वर्ष पूर्ण होने पर हुआ भव्य आयोजन

उज्जैन। आधुनिक बौद्ध धम्म के प्रचार-प्रसार के 70 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘बुद्धिस्ट फ्रेटरनिटी काउंसिल’ और ‘इंडिया-श्रीलंका फाउंडेशन’ के संयुक्त तत्वावधान में चेन्नई में एक विशाल धम्म यात्रा एवं बौद्ध भिक्खु प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन में उज्जैन और झांसी का प्रतिनिधित्व कर रहे भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।चेन्नई में आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर और धम्म यात्रा का सफल संचालन भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो द्वारा किया गया। उनके उत्कृष्ट योगदान और धम्म प्रचार के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें कार्यक्रम में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस आयोजन में दक्षिण भारत के सैकड़ों बौद्ध भिक्खु, उपासक और उपासिकाएं सम्मिलित हुए।
बोधगया में होगा अगला महासम्मेलन
कार्यक्रम के दौरान आगामी कार्ययोजनाओं की घोषणा भी की गई। बताया गया कि 20 से 29 अप्रैल 2026 तक बोधगया में भारतीयों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा। इसके बाद 30 अप्रैल 2026 को एक भव्य संगोष्ठी होगी।
इस संगोष्ठी के लिए पूरे भारत से बौद्ध भिक्खु और उपासकों को आमंत्रित किया गया है। साथ ही, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लेख भी आमंत्रित किए गए हैं, जिन्हें बाद में पुस्तक रूप में प्रकाशित किया जाएगा।
केरल से नागपुर तक की सफल यात्राएं
संगोष्ठी संयोजक डॉ. भारती प्रभु और अध्यक्ष धर्मेंद्रन ने ‘अशोक-अम्बेडकर यात्रा’ पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 2023, 2024 और 2025 में केरल से दीक्षाभूमि (नागपुर) तक तीन यात्राएं सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं। इन यात्राओं के दौरान सम्राट अशोक की कांस्य प्रतिमा केरल से नागपुर लाई गई थी। अब अगली धम्म प्रचार यात्रा बोधगया तक आयोजित करने की योजना है।
तमिलनाडु के बौद्ध स्थलों का होगा विकास
कार्यक्रम में तमिलनाडु के प्राचीन बौद्ध स्तूपों और स्थलों के सुचारू संचालन और विकास की कार्ययोजना भी तैयार की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. भारती प्रभु ने किया।
ये रहे उपस्थित
इस गरिमामयी आयोजन में तमिलनाडु सरकार के पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण सदस्य रामनाथ पुरम के भिक्खु मोरयार थेरो, भिक्खु सम्पत, भिक्खु शांति मुनि, भिक्खु धम्म रक्षित, वैज्ञानिक डॉ. शेखर अभबचिल, तनाबर, प्रोफेसर जागरण, एडवोकेट मिलियन, डॉ. रविचंद्रन, डॉ. शिलवरानि, शेरान, नीलवाणतय, नीलवन और याझिनी सहित दर्जन भर से अधिक वरिष्ठ बौद्ध भिक्खु और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।



