वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिंदी सेवी डॉ. प्रभुलाल चौधरी का असामयिक निधन, साहित्य जगत में शोक
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत सहित देशभर के साहित्यकारों ने दी श्रद्धांजलि, पैतृक गांव कसारी चौहान में हुआ अंतिम संस्कार

उज्जैन। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के संस्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार और राज्यपाल सम्मान प्राप्त शिक्षक डॉ. प्रभुलाल चौधरी का प्रयागराज के साहित्यिक प्रवास से लौटते समय असामयिक निधन हो गया। उनके निधन से साहित्य, समाज और संस्कृति जगत में शोक की लहर व्याप्त हो गई है।
राज्यपाल ने बताया अपूरणीय क्षति
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी विचारक, समाजसेवी, साहित्यकार और शिक्षाविद डॉ. चौधरी का देवलोक गमन हम सबके लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दुख की इस घड़ी में परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी।
पैतृक गांव में हुआ अंतिम संस्कार
महिदपुर रोड के निकट उनके पैतृक गांव कसारी चौहान में उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुक्तिधाम पर उनके पुत्र जितेंद्र चौधरी ने उन्हें मुखाग्नि दी। उनके निवास स्थान से निकली अंतिम यात्रा में गुर्जर गायरी समाज के सैकड़ों वरिष्ठ नागरिक, जनप्रतिनिधि, सरपंच, पत्रकार और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए।
शोकसभा में दी गई भावांजलि
अंतिम संस्कार के पश्चात आयोजित शोकसभा की अध्यक्षता सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने की। उन्होंने डॉ. चौधरी के साथ अपने साढ़े तीन दशकों के आत्मीय संबंधों को याद करते हुए साहित्य, शिक्षा और सांस्कृतिक संस्थाओं में उनके सक्रिय योगदान को रेखांकित किया।
इन्होंने अर्पित की श्रद्धांजलि
डॉ. चौधरी के असामयिक निधन पर पूर्व विधायक जितेंद्र गहलोत, नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ. हरिसिंह पाल, वरिष्ठ साहित्यकार सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, प्रो. जगदीश चंद्र शर्मा, डॉ. रामनिवास मानव, हरेराम वाजपेयी, डॉ. शहनाज शेख, मुकेश जोशी, डॉ. मीरा सिंह, शिक्षाविद डॉ. बृजकिशोर शर्मा, पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित, पूर्व संभागायुक्त डॉ. मोहन गुप्त, सूर्यकांत नागर, पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास, प्रो. हरिमोहन बुधौलिया, डॉ. हरीश कुमार सिंह, शिशिर उपाध्याय, वसुधा गाडगिल, लोक गायक सुंदरलाल मालवीय, डॉ. रामचंद्र ठाकुर, प्रो. राजेश कुमार गर्ग, डॉ. मीनाक्षी शांकरी, जगदीश कौर, श्रीराम दवे, संतोष सुपेकर, डॉ. सुवर्णा अशोक जाधव, डॉ. रणजीतसिंह अरोरा, डॉ. सीमा देवेंद्र जोशी, डॉ. शशांक दुबे, संदीप सृजन, डॉ. पदमचंद गांधी, डॉ. मधु समाधिया, यशवंत भंडारी, प्रदीप नवीन, डॉ. मोहसिन खान, डॉ. श्रीनिवास शुक्ल सरस, माया मेहता, नारायणी माया बधेका, राकेश छोकर, शिवा लोहारिया, डॉ. उर्वशी पंड्या, मेजर संजय मिश्रा, श्वेता मिश्रा, डॉ. अनवर शेख, डॉ. शाकिर शेख, डॉ. बाबा शेख, बालासाहब तोरस्कार, भरत शेणकर, डॉ. मोहन बैरागी, रमेशचंद्र चांगेसिया, डॉ. नेत्रा रावणकर, डॉ. तारा परमार, नरेश शर्मा, अनिल सेठिया, राजेश जैन और रामगोपाल परमार सहित अनेक साहित्यकारों एवं समाजसेवियों ने गहरा दुख व्यक्त किया।
62 वर्षीय डॉ. चौधरी अपने पीछे पुत्र जितेंद्र चौधरी, पुत्री प्रज्ञा चौधरी, पौत्र प्रणव चौधरी और पौत्री यशस्विनी चौधरी का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, नागरी लिपि परिषद, हिंदी परिवार, हिंदी अध्ययनशाला, ललित कला अध्ययनशाला, मेवाड़ा गायरी गुर्जर महासभा और गायत्री परिवार सहित विभिन्न संस्थाओं ने भी उनके महाप्रयाण पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।



