हास्य व्यंग्य कवि सुरेंद्र सिंह ठाकुर सर्किटाचार्य सम्मान से अलंकृत
विक्रम वाटिका परिवार के होली मिलन समारोह में कवियों ने बिखेरीं हास्य की छटा

उज्जैन। विक्रम वाटिका परिवार द्वारा विक्रम वाटिका में प्रातःकालीन व्यायाम प्रेमियों के होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन समिति के संयोजक चंद्र विजय सिंह छोटू बना एवं पंकज पंवार ने बताया कि हास्य व्यंग्य एवं मस्ती से सराबोर ठहाकों की महफिल में हास्य व्यंग्य कवि सुरेंद्र सिंह ठाकुर को सर्किटाचार्य सम्मान से अलंकृत किया गया।
समारोह में हास्य व्यंग्य की पिचकारियां चलीं। कवि राहुल शर्मा ने कहा कि काव्य मंचों पर जिसने मुस्कान सजाई जीवन में खूब कवयित्रियां पटाई, दुबले पतले हैं किंतु पूरे फिट हैं हास्य व्यंग्य के मुस्कुराते सर्किट हैं। कवि डॉ विवेक विक्रम ने रिटायरमेंट की जिंदगी पर तंज करते हुए कहा कि रिटायर होया बाद कैसी चली री जिंदगी की गाड़ी यार। कई मत पूछो, अबे नी तारीख याद रे नी वार, अबे तो रोज रविवार।
अंतरराष्ट्रीय कवि दिनेश दिग्गज ने फरमाया कि रिश्ते तमाम रील की नोजी में आ गए, भैया के सारे ऐब तो भौजी में आ गए, तुम ही बताओ कैसे लिखें गीत और गज़ल, अश्कों के बहते धारे इमोजी में आ गए। हास्य कवि विजय गोपी ने व्यंग्य की टोपी पहनते हुए कहा कि आईना खरीदा नहीं, तेल कभी लिया नहीं। गंजों ने तो कंघों का भी खर्चा बचाया है, योगी आदित्यनाथ भी हमारे जैसे केश विहीन, गुंडों पर देखो कैसा बुलडोजर चलाया है। गीतकार कुमार संभव ने कहा कि सोच रहा हूँ कैसे होगा, थोड़ा मैं घबराया हूँ। इन मुश्किल हालातों में, ये गीत सुनाने आया हूँ। कार्यक्रम का सजेदार एवं मजेदार संचालन स्वामी मुस्कुराके शैलेंद्र व्यास ने किया। इस अवसर पर विक्रम वाटिका परिवार के अमित शर्मा, सुरेंद्र दयाल, पुष्कर बाहेती, सुगन चंद जैन, कवि अशोक भाटी, दिनेश अनल, शशांक दुबे, मुकेश जोशी, आर. एस. चौहान, श्यामदेव महेश्वरी, दिलीप, गोविंद, तेज सिंह सांखला, दिनेश विजयवर्गीय, अजय गहलोत, श्याम महेश्वरी, नरेंद्र चौरसिया, नवतेज सिंह आदि उपस्थित थे।



