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महाकाल मंदिर में बेरिकेड्स पर गिरे श्रद्धालु, भगदड़ जैसे हालात के बीच टला बड़ा हादसा

अस्पताल पहुंचे एक दर्जन लोग, इधर नागचंद्रेश्वर के 10 लाख तो महाकाल के 4 लाख से अधिक भक्तों ने किए दर्शन

उज्जैन। नागपंचमी और सावन सोमवार के महासंयोग पर महाकालेश्वर मंदिर में आस्था के सैलाब के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई जब बेरिकेड्स पर श्रद्धालु एक के ऊपर एक गिरते चले गए। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन भगदड़ जैसी स्थिति के चलते करीब एक दर्जन लोगों को जिला चिकित्सालय ले जाना पड़ा।

लाखों भक्तों ने टेका मत्था, सवारी में उमड़े 6 लाख श्रद्धालु

अत्यधिक भीड़ के बावजूद रात 9 बजे तक 10 लाख 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान नागचंद्रेश्वर तथा 4 लाख 23 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन लाभ प्राप्त किए। भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट रात 12 बजे तक खुले रहे। वहीं बाबा महाकाल की तीसरी सवारी भी धूमधाम से निकाली गई, जिसमें 6 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए।

10 प्रमुख स्थानों पर स्वास्थ्य टीमों ने संभाला मोर्चा

दिनभर स्वास्थ्य टीमों ने सत्यनारायण मंदिर, हरसिद्धि मंदिर परिसर, मंदिर परिसर प्रवेश द्वार, बड़ा गणेश प्रवेश द्वार और भील समाज धर्मशाला सहित 10 अलग-अलग स्थानों पर मोर्चा संभाले रखा। यहां घबराहट, पैर में चोट, बेचैनी, हाई ब्लड प्रेशर और मिर्गी जैसी शिकायतों पर तुरंत प्राथमिक उपचार देकर आवश्यकतानुसार अस्पताल भेजा गया।

प्रशासन का दावा, व्यक्तिगत कारणों से बिगड़ी तबीयत

मंदिर प्रशासन के अनुसार उज्जैन निवासी श्रद्धालु सागर पिता मनीष को बेरिकेड से पैर में चोट लगी थी, जबकि शेष शिकायतें श्रद्धालुओं के व्यक्तिगत स्वास्थ्य कारणों से जुड़ी थीं। प्रशासन का कहना है कि सुदृढ़ व्यवस्थाओं के कारण केवल 10-12 लोगों को ही प्राथमिक उपचार की जरूरत पड़ी और उपचार के बाद श्रद्धालुओं को डिस्चार्ज कर दिया गया।

36 घंटे मुस्तैद रहा अमला, 24 एंबुलेंस और 2400 जवान रहे तैनात

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए 21 स्थलों पर 350 स्वास्थ्यकर्मी और 24 एंबुलेंस निरंतर सेवारत रहीं। व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए 2400 से अधिक पुलिसकर्मी, 2000 से अधिक मंदिर सुरक्षा गार्ड, 1500 से अधिक नगर निगम व मंदिर समिति के सफाई कर्मचारी, 300 से अधिक राजस्व अधिकारी-कर्मचारी और 220 से अधिक विद्युत सुरक्षाकर्मियों ने 36 घंटे से अधिक समय तक लगातार अपने कर्तव्य स्थलों पर मुस्तैद रहकर सेवाएं दीं।

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