गपशप
शिप्रा प्रदूषण, सांदीपनि आश्रम और भू-माफियाओं के खिलाफ आचार्य सत्यम् का हल्ला बोल; 23 मार्च से दिल्ली में आमरण अनशन
18 मार्च को उज्जैन कमिश्नर कार्यालय पर होगा सांकेतिक सत्याग्रह; कान्ह डायवर्शन योजना को बताया जनधन की भारी बर्बादी
उज्जैन। मालव रक्षा अनुष्ठान के संयोजक अधिवक्ता आचार्य सत्यम् ने शिप्रा नदी के प्रदूषण, सांदीपनि आश्रम में महर्षि की मूर्ति की अनुपस्थिति और भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक सहित विभिन्न जन समस्याओं को लेकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। इन ज्वलंत मुद्दों के समाधान के लिए 18 मार्च को उज्जैन संभाग मुख्यालय पर सांकेतिक सत्याग्रह किया जाएगा। यदि इसके बाद भी शासन-प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 23 मार्च से नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर संसद सत्र के दौरान आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित सूचना भेज दी गई है।
करोड़ों की कान्ह डायवर्शन योजना विफल, पुराने तालाबों का हो उपयोग
आचार्य सत्यम् ने बताया कि सिंहस्थ 2028 के नाम पर अरबों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन शिप्रा नदी आज भी आठ महीने गंदे नाले की तरह बहती है। कान्ह नदी के जहरीले पानी को रोकने के लिए बनाई गई क्लोज डक्ट योजना पूरी तरह से विफल और तुगलकी है। इस योजना के जरिए कान्ह का पानी चंबल, यमुना और गंगा तक पहुंचाकर अन्य नदियों को भी प्रदूषित किया जा रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि करोड़ों खर्च करने के बजाय कान्ह के पानी को रियासत काल में निर्मित करोहन, लेकोड़ा, बामोरा और टंकारिया तालाबों में डालकर उपचारित किया जा सकता है, जिसमें 25 करोड़ रुपये से भी कम का खर्च आएगा।
सांदीपनि आश्रम में स्थापित हो महर्षि की ‘ऋषि स्वरूप’ प्रतिमा
एक अन्य प्रमुख मुद्दे पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि योगेश्वर श्रीकृष्ण के गुरुकुल सांदीपनि आश्रम में महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा ‘ऋषि स्वरूप’ में स्थापित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि महर्षि सांदीपनि 5000 साल पहले हुए थे और वे शिव भक्त थे। वर्तमान में वहां जो स्वरूप है वह वल्लभाचार्य की तरह 11 नंबरी तिलक लगाए और हाथ में पोथी (किताब) लिए हुए है, जबकि महर्षि सांदीपनि कोई पुजारी नहीं थे जो भागवत का पारायण करें। आचार्य ने बताया कि उनके ससुर ने संगमरमर की मूर्ति बनवाई थी, जिसे विवाद के चलते कुएं में फेंक दिया गया था। उनकी मांग है कि आश्रम में बने व्यास कक्ष या किसी खाली स्थान पर महर्षि की यथोचित ‘ऋषि स्वरूप’ प्रतिमा स्थापित की जाए।
भू-माफियाओं का राज, पुलिस व प्रशासन मौन
आचार्य सत्यम् ने प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत गौचर भूमियों पर भू-माफियाओं का कब्जा है। उज्जैन और आगर-मालवा जिले में श्रवणसिंह शेखावत और अटल गिरोह जैसे माफिया बेशकीमती शासकीय व रेल्वे की जमीनों पर काबिज हैं। न्यायालयीन आदेशों के बावजूद प्रशासन माफियाओं को संरक्षण दे रहा है। इसके अतिरिक्त आगरा-मुंबई हाई-वे निर्माण में भूमि अधिग्रहण का शिकार हुए बालुराम मेघवाल और नारायण बागरी जैसे दलित किसानों को अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है।
गरीब किसान की जमीन पर भतीजे का कब्जा
अपनी जान को खतरा बताते हुए आचार्य सत्यम् ने स्पष्ट किया कि विवादित 16 बीघा कृषि भूमि उनकी नहीं है, बल्कि उनके बड़े भाई ने वह जमीन कारूलाल गुर्जर नामक एक गरीब व्यक्ति को बेची थी। पिछले 25 सालों से उस पर गुर्जर का ही कब्जा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनके भतीजे त्रिलोक पुरोहित ने उस गरीब गुर्जर की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है। आचार्य सत्यम् उस गरीब किसान के हक में अपने भतीजे के खिलाफ लड़ रहे हैं, इसी वजह से उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भानपुरा और उज्जैन पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
आचार्य सत्यम् ने स्पष्ट किया है कि यदि जनहित और राष्ट्रहित से जुड़ी इन मांगों का त्वरित निराकरण नहीं हुआ, तो होने वाले आमरण अनशन और उसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश और भारत शासन की होगी।


