अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, मध्य-पूर्व में भड़की महायुद्ध की आग
40 बंकर बस्टर बमों से तबाह हुआ तेहरान का खुफिया ठिकाना; ईरान में 40 दिन का शोक घोषित, ट्रम्प और ईरान ने दी एक-दूसरे को विनाशकारी अंजाम भुगतने की चेतावनी।

तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के दूसरे दिन एक बड़े और ऐतिहासिक घटनाक्रम में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो गई है। इजरायली एफ-35 फाइटर जेट्स ने ईरान के एयर डिफेंस को भेदते हुए तेहरान स्थित ‘बेत-ए-रहबरी’ पैलेस पर 2000 किलो के 40 लेजर-गाइडेड बंकर बस्टर बम गिराए। इस भीषण बमबारी में अंडरग्राउंड ठिकाने में छिपे खामेनेई मारे गए।
इस खुफिया बैठक में मौजूद ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादे, आर्मी चीफ अमीर खातमी और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के चीफ मोहम्मद पाकपोर सहित लगभग 40 शीर्ष सैन्य अफसर और धार्मिक नेता भी इस हमले में मारे गए हैं। ईरान सरकार ने खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि करते हुए देश में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है।
पलटवार और धमकियों का दौर
सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ‘रेड लाइन’ पार कर दी है और उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई की न सोचे, वरना उसे सोच से परे विनाश देखना पड़ेगा।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अरब सागर में तैनात अमेरिकी युद्धपोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ पर 4 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। खाड़ी में अमेरिका के 9 ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। ईरान की तरफ से कुल 165 बैलिस्टिक मिसाइलें और 541 ड्रोन दागे गए हैं। रविवार को हुए अमेरिकी हमलों में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद भी मारे गए हैं।
नई कमान: 3 सदस्यीय अंतरिम काउंसिल के हाथ में सत्ता
खामेनेई की मौत के बाद पैदा हुए नेतृत्व के शून्य को भरने के लिए फिलहाल एक 3 सदस्यीय ‘अंतरिम काउंसिल’ का गठन किया गया है। इसमें अली रजा अराफी, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान और चीफ जस्टिस गुलाम हुसैन मोहसेनी शामिल हैं। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, यह काउंसिल केवल एक-दो दिन काम करेगी और जल्द ही नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति की जाएगी।
युद्ध के लंबा खिंचने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई की मौत और ईरान समर्थित गुटों (हिज्बुल्लाह, हूती आदि) की मौजूदगी के कारण यह युद्ध लंबा खिंच सकता है। अमेरिका के लिए जहां यह बड़ा कूटनीतिक दबाव है, वहीं इजरायल के लिए इसे एक बड़ी जीत माना जा रहा है।



