पाठशाला
नारी ने परंपरा से ही भविष्य नया रच डाला
कालिदास कन्या महाविद्यालय में 'विज्ञान में नारी शक्ति' पर हुआ मंथन

उज्जैन। शासकीय कालिदास कन्या महाविद्यालय उज्जैन में 2 मार्च को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के उपलक्ष्य में ‘विज्ञान में नारी शक्ति: परंपरा से प्रगति तक’ विषय पर एक प्रेरणादायी व्याख्यान का आयोजन किया गया। डॉ. भावना नागर के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं महाविद्यालय के कीर्तिगान से हुआ। यह आयोजन नारी शक्ति, भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक चेतना के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण सिद्ध हुआ।
महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और मातृ-डीएनए पर चर्चा
अतिथि स्वागत के पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. निश्चल यादव ने छात्राओं को विश्व एवं भारत की विख्यात महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों से परिचित कराया। उन्होंने विज्ञान एवं अनुसंधान से संबंधित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए छात्राओं को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. रेखा खन्ना ने मानव ऊर्जा के मूल स्रोत के रूप में मातृ-डीएनए कोशिकाओं की वैज्ञानिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नारी की सृजनात्मक शक्ति को वैज्ञानिक दृष्टि से स्पष्ट किया। वहीं, महाविद्यालय की पूर्व प्राध्यापक डॉ. अमिता सिंघल ने छात्राओं को महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से अवगत कराया और वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुशासन एवं सतत प्रयास को सफलता का आधार बताया।
परंपरा और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. वंदना गुप्ता ने भारतीय परंपरा और वैज्ञानिकता के समन्वित स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। नारी शक्ति ने इन वैज्ञानिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज को स्वस्थ, संतुलित और प्रगतिशील दिशा प्रदान की है। अपने उद्बोधन को काव्यमय स्वर देते हुए उन्होंने कहा—
“परम्परा की धूप में पली, विज्ञान की शीतल छाँव बनी,
संस्कारों की ज्योति जली तो, प्रगति की नव ठाँव बनी।
नारी ने सूत्र सँभाले ऐसे, जीवन हुआ विज्ञानमय,
भारत की हर प्राची से फिर उन्नति की नव भोर जगी।
औषधि की हर पत्ती में उसने ज्ञान-दीप जलाया है।”
छात्राओं ने लगाई आकर्षक विज्ञान प्रदर्शनी
इस अवसर पर विज्ञान संकाय की छात्राओं द्वारा आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई जिसमें विविध वैज्ञानिक अवधारणाओं का सृजनात्मक प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर मोनिका परमार ने अतिथि परिचय दिया एवं डॉ. मधु खंडेलवाल ने विज्ञान संकाय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एकता दूबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. भावना नागर द्वारा किया गया। इस दौरान समस्त महाविद्यालयीन परिवार एवं बड़ी संख्या में छात्राओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।
महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों और मातृ-डीएनए पर चर्चा
अतिथि स्वागत के पश्चात मुख्य अतिथि डॉ. निश्चल यादव ने छात्राओं को विश्व एवं भारत की विख्यात महिला वैज्ञानिकों की उपलब्धियों से परिचित कराया। उन्होंने विज्ञान एवं अनुसंधान से संबंधित विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी देते हुए छात्राओं को इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट वक्ता डॉ. रेखा खन्ना ने मानव ऊर्जा के मूल स्रोत के रूप में मातृ-डीएनए कोशिकाओं की वैज्ञानिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नारी की सृजनात्मक शक्ति को वैज्ञानिक दृष्टि से स्पष्ट किया। वहीं, महाविद्यालय की पूर्व प्राध्यापक डॉ. अमिता सिंघल ने छात्राओं को महान वैज्ञानिक सी.वी. रमन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से अवगत कराया और वैज्ञानिक जिज्ञासा, अनुशासन एवं सतत प्रयास को सफलता का आधार बताया।
परंपरा और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. वंदना गुप्ता ने भारतीय परंपरा और वैज्ञानिकता के समन्वित स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा और वैज्ञानिक दृष्टि परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। नारी शक्ति ने इन वैज्ञानिक मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज को स्वस्थ, संतुलित और प्रगतिशील दिशा प्रदान की है। अपने उद्बोधन को काव्यमय स्वर देते हुए उन्होंने कहा—
“परम्परा की धूप में पली, विज्ञान की शीतल छाँव बनी,
संस्कारों की ज्योति जली तो, प्रगति की नव ठाँव बनी।
नारी ने सूत्र सँभाले ऐसे, जीवन हुआ विज्ञानमय,
भारत की हर प्राची से फिर उन्नति की नव भोर जगी।
औषधि की हर पत्ती में उसने ज्ञान-दीप जलाया है।”
छात्राओं ने लगाई आकर्षक विज्ञान प्रदर्शनी
इस अवसर पर विज्ञान संकाय की छात्राओं द्वारा आकर्षक एवं ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई जिसमें विविध वैज्ञानिक अवधारणाओं का सृजनात्मक प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में प्रोफेसर मोनिका परमार ने अतिथि परिचय दिया एवं डॉ. मधु खंडेलवाल ने विज्ञान संकाय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एकता दूबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. भावना नागर द्वारा किया गया। इस दौरान समस्त महाविद्यालयीन परिवार एवं बड़ी संख्या में छात्राओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति रही।


