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प्रेगनेंसी में शरीर में दर्द: क्यों होता है और कैसे पाएं राहत?

प्रेगनेंसी किसी भी महिला के लिए एक बेहद खूबसूरत और खास एहसास है। हालांकि, एक नए जीवन को जन्म देने की इस प्रक्रिया में शरीर कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलावों से गुजरता है। इन्हीं बदलावों के कारण अक्सर महिलाओं को पीठ, कमर, पैरों और जोड़ों में दर्द का सामना करना पड़ता है।
आइए जानते हैं इस दर्द के पीछे के मुख्य कारण क्या हैं और इनसे कैसे बचा जा सकता है:
शरीर में दर्द के 5 मुख्य कारण
- हार्मोनल बदलाव: प्रेगनेंसी में ‘प्रोजेस्टेरोन’ (Progesterone) हार्मोन का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह हार्मोन डिलीवरी को आसान बनाने के लिए मांसपेशियों और लिगामेंट्स को ढीला करता है, जिसके परिणामस्वरूप जोड़ों, कमर और पीठ में दर्द होने लगता है।
- वजन का बढ़ना: इस दौरान शरीर का वजन 10 से 15 किलो तक बढ़ना एक सामान्य बात है। इस अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव रीढ़ की हड्डी और घुटनों पर पड़ता है, जिससे थकावट और दर्द होता है।
- पॉश्चर (उठने-बैठने के तरीके) में बदलाव: जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदलता है और शरीर आगे की तरफ झुकने लगता है। इससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है और कमर के निचले हिस्से, गर्दन और कंधों में दर्द शुरू हो जाता है।
- गैस और कब्ज: गर्भावस्था में पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इसके कारण गैस, अपच और कब्ज की समस्या होती है, जिससे पेट में ऐंठन या दर्द महसूस हो सकता है।
- थकान और तनाव: शरीर अंदर पल रहे शिशु के विकास के लिए सामान्य से ज्यादा मेहनत करता है। इसके कारण थकान, कमजोरी और शारीरिक दर्द होना एक आम बात है।
दर्द से राहत पाने के आसान उपाय (बचाव)
- हल्की एक्सरसाइज: डॉक्टर की सलाह से हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, प्रेगनेंसी योग या वॉक (टहलना) को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। जरूरत पड़ने पर प्रीनेटल फिजियोथेरेपी भी ली जा सकती है।
- सही पॉश्चर: उठते, बैठते और चलते समय अपनी पीठ को सीधा रखने की कोशिश करें। बैठते या लेटते समय सपोर्ट के लिए कुशन (तकिए) का इस्तेमाल करें।
- खान-पान और हाइड्रेशन: संतुलित आहार लें जिससे वजन नियंत्रित रहे। दिनभर में खूब पानी पिएं और एक साथ ज्यादा खाने की बजाय, थोड़ी-थोड़ी देर में छोटे मील लें।
- आराम और अच्छी नींद: रोजाना कम से कम 8-9 घंटे की अच्छी नींद लें। लगातार लंबे समय तक खड़े रहने से बचें और बैठते समय पैरों को किसी स्टूल पर थोड़ा ऊंचा रखें।
- फुटवियर का ध्यान: हाई हील्स पहनने से बिल्कुल बचें, आरामदायक और फ्लैट जूते या चप्पल ही पहनें।
- तनाव से दूरी: तनाव मुक्त रहने के लिए मेडिटेशन (ध्यान) या गहरी सांस लेने वाले व्यायाम करें।डॉक्टर को कब दिखाएं?
प्रेगनेंसी में हल्का दर्द होना सामान्य है, लेकिन अगर दर्द असहनीय हो, लगातार बना रहे, या इसके साथ बुखार, ब्लीडिंग, और तेज सिरदर्द जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
इस संवेदनशील समय में महिला को सबसे ज्यादा अपने परिवार और पार्टनर के सहयोग व प्यार की जरूरत होती है।



