महाकाल मंदिर परिसर से विश्व को दिया ‘राम नाम सत्य है’ का संदेश
उज्जैन श्मशान भूमि शोध संस्थान का आयोजन, अंतिम संस्कार में मानवीय गरिमा बनाए रखने पर जोर

उज्जैन। उज्जैन श्मशान भूमि शोध संस्थान द्वारा 7 मार्च की रात 7:30 बजे सांध्य आरती के पश्चात महाकाल मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। बाबा महाकाल की अनुज्ञा से हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य आत्मा के सम्मान, अंतिम संस्कार की गरिमा और ‘राम नाम सत्य है’ के संदेश को विश्व पटल पर प्रसारित करना था।
आयोजन के संबंध में जानकारी देते हुए संस्था के संस्थापक रामनरेश शुक्ला ने बताया कि संस्थान ने इस विषय पर बारीकी से शोध किया है। शोध के अनुसार, मृत्यु के उपरांत समाज मृत शरीर से घृणा करने लगता है और उसे अछूत मानने लगता है। कई बार लोग अंतिम संस्कार को टालते हुए इसे सरकार का काम बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचते हैं। इसके परिणामस्वरूप कई स्थानों पर शवों की भारी दुर्दशा होती है, जिससे मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचती है और मृत आत्माओं के प्रति सम्मान का भाव समाप्त हो जाता है।
विश्व में महाकाल को प्रिय ‘राम नाम सत्य है’ के संदेश और अंतिम संस्कार के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चित्रों के माध्यम से एक प्रारूप प्रस्तुत कर विश्व को संदेश देने का प्रयास किया गया, जिसे महाकाल मंदिर के पुजारी दिनेश पुजारी द्वारा बाबा महाकाल को अर्पित किया गया।
इस अवसर पर महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष के प्रतिनिधि को सम्मान पत्र भेंट कर अंतिम संस्कार के सम्मान का संदेश पूरे विश्व तक पहुंचाने का अनुरोध भी किया गया। संस्था का उद्देश्य है कि महाकाल की कृपा से यह संदेश समूचे विश्व तक पहुंचे, ताकि मृत्यु के बाद मानव शरीर की दुर्गति न हो और समाज प्रत्येक मृत व्यक्ति का पूर्ण विधि-विधान के साथ सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार करे।



